जनगणना-2027 की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बार की जनगणना पूरी तरह हाईटेक और डिजिटल होने जा रही है, जिसके लिए शुक्रवार से आधिकारिक वेब पोर्टल खोल दिया जाएगा। नालंदा जिले के निवासी अब 17 मई तक se.census.gov.in पर लॉगिन कर घर बैठे या किसी अन्य शहर से भी अपना विवरण खुद अपलोड कर सकेंगे। हालांकि, खुद से अपलोड किए गए इन आंकड़ों का बाद में पर्यवेक्षकों की ओर से भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद ही उन्हें अंतिम रूप से स्वीकार किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के समानांतर 2 मई से 31 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर भी आंकड़ों का संकलन करेंगे। प्रशासन ने सुचारू गणना के लिए कमान संभाल ली है और जिले में 126 मास्टर ट्रेनरों की टीम प्रखंड स्तर पर कर्मियों और पर्यवेक्षकों को सघन प्रशिक्षण दे रही है। रहुई प्रखंड के पतासंग में प्रशिक्षण के पहले बैच का कार्य पूरा हो चुका है, जहां बीडीओ धर्मराज कुमार की देखरेख में मास्टर ट्रेनरों ने कर्मियों को डिजिटल ऐप के संचालन और गणना की बारीकियों से अवगत कराया। गणना कार्य के लिए 600 से 800 की आबादी पर एक प्रगणक की तैनाती की गई है, जबकि प्रत्येक छह से आठ प्रगणकों के काम की निगरानी एक पर्यवेक्षक करेंगे। जिले की करीब 38 लाख की आबादी को कवर करने के लिए साढ़े छह हजार से अधिक कर्मियों को मैदान में उतारा जाएगा, जिसमें दस फीसदी कर्मियों को आरक्षित श्रेणी में रखा गया है। दो फेज में जनगणना पूरी व्यवस्था की निगरानी पांच अलग-अलग स्तरों पर की जाएगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी को प्रधान जनगणना पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि एडीएम जिला जनगणना पदाधिकारी और जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अपर जिला जनगणना पदाधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। प्रखंड स्तर पर बीडीओ चार्ज जनगणना पदाधिकारी की भूमिका निभाएंगे। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी नंदकिशोर रजक ने बताया कि यह जनगणना दो प्रमुख चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में मकानों का सूचीकरण और उनकी गिनती की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी। प्रगणक मोबाइल फोन पर ‘एचएलओ ऐप’ के माध्यम से कुल 33 अनिवार्य प्रश्नों का डेटा जुटाएंगे। डिजिटल सर्वे में मकान के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, स्वामित्व की स्थिति, जल के स्रोत, शौचालय की सुविधा, खाना पकाने के ईंधन के प्रकार और वाहनों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी भरने की सुविधा से डेटा संकलन में पारदर्शिता आएगी और समय की भी बचत होगी।
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