जिमीकंद, जिसे सुरन या ओल भी कहा जाता है, यह भारतीय रसोई की एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट सब्जी है. यह देखने में जितनी साधारण लगती है, उतनी ही सावधानी इसको बनाने के लिये जरूरी होती है. जिमीकंद में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व अगर सही तरीके से हटाए न जाएं, तो यह खुजली, जलन और गले में चुभन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. इसलिए जिमीकंद की सब्जी बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
1. छीलते समय हाथों की सुरक्षा जरूरी
जिमीकंद के कच्चे रूप में कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल पाए जाते हैं, जो त्वचा के संपर्क में आते ही खुजली और जलन पैदा कर सकते हैं.
सावधानी:
जिमीकंद छीलते समय हाथों में सरसों का तेल या नारियल तेल लगा लें.
चाहें तो हाथों में दस्ताने भी पहन सकते हैं.
2. अच्छी तरह धोना न भूलें
जिमीकंद को काटने के बाद सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि 2–3 बार पानी से अच्छे से धोएं.
इससे उसका चिपचिपापन और हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं.
3. नमक या इमली के पानी में भिगोएं
काटे हुए जिमीकंद को 10–15 मिनट के लिए नमक मिले पानी या इमली के पानी में भिगोना बहुत जरूरी है.
यह उपाय जलन पैदा करने वाले तत्वों को निष्क्रिय करने में मदद करता है.
4. अधपका जिमीकंद न खाएं
जिमीकंद को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं. अधपका जिमीकंद गले में खुजली, जलन और पेट की परेशानी पैदा कर सकता है.
सब्जी बनाते समय ढककर धीमी आंच पर अच्छे से गलने तक पकाएं.
5. सही मसालों का इस्तेमाल करें
जिमीकंद की सब्जी में इमली, नींबू, दही या अमचूर, साथ ही अजवाइन और हींग डालना फायदेमंद होता है.
ये सामग्री जिमीकंद की तासीर को संतुलित करती हैं और पाचन में मदद करती हैं.
6. जिन लोगों को एलर्जी है, वे सावधान रहें
अगर पहले कभी जिमीकंद खाने से,
गले में खुजली
मुंह में जलन
पेट दर्द
जैसी समस्या हो चुकी है, तो इसे दोबारा खाने से बचें या बहुत कम मात्रा में लें.
जिमीकंद खाने के फायदे
पाचन को बेहतर बनाता है.
कब्ज में राहत देता है.
आयरन और फाइबर से भरपूर.
कमजोरी दूर करने में मददगार.
जिमीकंद की सब्जी स्वाद और पोषण से भरपूर होती है, लेकिन थोड़ी‑सी लापरवाही इसे नुकसानदायक बना सकती है. सही सफाई, भिगोने और पकाने की प्रक्रिया अपनाकर आप बिना किसी डर के जिमीकंद का पूरा स्वाद और लाभ उठा सकते हैं.

