Friday, May 1, 2026
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सरकार ने देश की तिजोरी भरने का कर लिया इंतजाम, लेकिन आपकी जेब पर नहीं पड़ेगा भार!


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केंद्र सरकार ने 1 मई 2026 से डीजल और एटीएफ के निर्यात पर नई ड्यूटी दरें लागू कर दी हैं. डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 33 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी तय की गई है, जबकि पेट्रोल पर अभी भी कोई टैक्स नहीं लगाया गया है. यह फैसला घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लिया गया है. सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन ड्यूटी दरों की समीक्षा करती है.

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देश में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. (AI)

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर एक बार फिर सख्ती दिखाई है. 1 मई 2026 से लागू होने वाली नई ड्यूटी दरों का ऐलान कर दिया गया है. इसका मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सरकार निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है. सरकार ने 27 मार्च 2026 से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लागू किया था. यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि कंपनियां निर्यात के बजाय घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दें. इन ड्यूटी दरों की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है.

नए नोटिफिकेशन के अनुसार, डीजल के निर्यात पर 23 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी तय की गई है. इसमें पूरा हिस्सा स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के तहत है. रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य रखा गया है. वहीं एटीएफ के निर्यात पर 33 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी लागू की गई है. यह भी पूरी तरह स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के तहत है. पेट्रोल के निर्यात पर फिलहाल कोई ड्यूटी नहीं है.

हर 15 दिन में होती है समीक्षा

सरकार इन दरों को स्थिर नहीं रखती. हर 15 दिन में इनकी समीक्षा की जाती है. यह समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तैयार उत्पादों की कीमतों के आधार पर होती है. पिछले पखवाड़े के औसत दामों को ध्यान में रखकर नई दरें तय की जाती हैं.

घरेलू कीमतों पर असर नहीं

इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा. घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी फिलहाल ईंधन की कीमतों में कोई सीधा बदलाव नहीं होगा.

सरकार का मकसद क्या है

सरकार का मुख्य लक्ष्य घरेलू सप्लाई को स्थिर रखना है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियां ज्यादा निर्यात करना चाहती हैं. इससे देश के भीतर कमी हो सकती है. इसलिए सरकार ड्यूटी बढ़ाकर निर्यात को कम आकर्षक बनाती है. इससे देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता बनी रहती है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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