Wednesday, June 17, 2026
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‘रामायण-महाभारत के युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक…’ राजनाथ सिंह ने दुश्मनों को चेताया


नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके अद्वितीय शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत के सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्थापित किया है. राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आतंकवाद के समूल उन्मूलन के लिए निर्णायक कार्रवाई करने के अपने अटूट संकल्प पर दृढ़ता से कायम है. वह शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘शौर्य’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर किया गया.

राजनाथ सिंह ने कहा कि रामायण और महाभारत के युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक… हमारे योद्धाओं ने अपने इसी शौर्य का परिचय एक बार नहीं बार-बार दिया है और इस अवसर पर मैं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ज़िक्र करना चाहुंगा और मैं ऑपरेशन की हर योद्धा को और उनके परिजनों को नमन करता हूं.

उन्होंने कहा, “मुझे यह कहते हुए भी बड़ा गर्व होता है कि हमारी सेनाओं का शौर्य केवल युद्ध भूमि तक सीमित नहीं है. देश-दुनिया में जब भी कोई दुर्भाग्यपूर्ण आपदा आती है, चाहे भूकंप हो, बाढ़ हो, सुनामी हो या फिर कुछ भी हो, वहां हमारे जवान तुरंत सहायता पहुंचाते हैं.”

रक्षा मंत्री ने सैनिकों की बहादुरी, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ व ‘स्वयं से पहले सेवा’ का उनका मूल मंत्र प्राचीन काल से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे आधुनिक अभियानों तक भारत की सैन्य परंपराओं की पहचान रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों का साहस केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश-विदेश में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पहुंचते हैं और मानवीय सहायता उपलब्ध कराते हैं.

रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारे सैनिक अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए हथियार उठाते हैं और संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक भोजन, दवाइयां तथा अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाते हैं. यही हमारे रक्षा बलों की सबसे बड़ी विशेषता और गौरव है.”

यह कार्यक्रम कला एवं शौर्य का एक अद्वितीय संगम बना, जिसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सैकड़ों जवान व पद्मश्री से सम्मानित अनूप जलोटा, कैलाश खेर, हर्षदीप कौर और मनोज मुंतशिर जैसे प्रतिष्ठित कलाकार उपस्थित रहे.

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शौर्य और कला को अक्सर एक-दूसरे के विपरीत माना जाता है, जबकि वास्तविकता में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. उन्होंने कहा कि शौर्य एवं कला, दोनों ही मानवीय संवेदनाओं, भावनाओं और संकल्प की सशक्त अभिव्यक्तियां हैं.

उन्होंने कहा कि सैन्य बैंड के मार्चिंग गीत सैनिकों में एकता, अनुशासन और सामूहिक भावना का संचार करते हैं. उन्होंने बताया कि संगीत व्यक्तिगत पहचान को सामूहिक शक्ति में परिवर्तित करने का माध्यम बनता है. रक्षा मंत्री ने कहा कि यह भावना भारतीय सशस्त्र बलों की संस्कृति, परंपराओं और कार्यशैली में गहराई से समाहित है.

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ द एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ इस कार्यक्रम में शामिल हुए.



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