Sunday, May 17, 2026
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द्वारकेश पॉडकास्ट के मुरीद टेक दिग्गज: जकरबर्ग को कह दिया था- दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ेगा, हुआंग-नडेला करते हैं घंटों चर्चा




एआई की जादुई दुनिया में जहां बड़े-बड़े दिग्गज भी तकनीक के शोर में खो जाते हैं, वहीं द्वारकेश पटेल सिलिकॉन वैली के एआई समुदाय की सबसे अहम आवाज बनकर उभरे हैं। 25 वर्षीय भारतीय मूल के द्वारकेश के पॉडकास्ट को प्रति एपिसोड औसतन 20 लाख बार सुना जाता है। मार्क जकरबर्ग, सत्या नडेला और जैंसन हुआंग जैसे दिग्गज सीईओ उनके साथ घंटों तक चर्चाएं करते हैं। लोकप्रियता ऐसी है कि उनके साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ लग जाती है। पटेल इंटरव्यू के लिए गहन अध्ययन करते हैं और एआई की जटिल भाषा को नए अंदाज में पेश करते हैं। बोरियत से शुरू हुआ सफर द्वारकेश के पॉडकॉस्ट का सफर 2020 में एक कॉलेज हॉस्टल के कमरे से शुरू हुआ था। कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ ठप हो गया था, तब यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के छात्र द्वारकेश कुछ अलग करने की तलाश में थे। उन्होंने अपनी जिज्ञासा के दम पर विशेषज्ञों को ईमेल करना शुरू किया। आज ‘द्वारकेश पॉडकास्ट’ की अलग पहचान है। एंथ्रोपिक की मुख्य संचार अधिकारी साशा डी मारिग्नी कहती हैं, ‘लोग उन्हें केवल कमेंटेटर नहीं मानते, वे एआई समुदाय के अभिन्न अंग हैं।’ इंटरव्यू के लिए उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे नया सीखने को मिले द्वारकेश एक इंटरव्यू के लिए दो हफ्ते तक रिसर्च करते हैं। फ्लैश कार्ड बनाते हैं। विषयों को समझने के लिए इकोनॉमिक्स, फिजिक्स तक के ट्यूटर हायर करते हैं। साख ऐसी है कि उन्होंने मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग से भी इंटरव्यू को दोबारा रिकॉर्ड करने के लिए कह दिया था। एनवीडिया के सीईओ जैंसन हुआंग और ओपनएआई के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक इल्या सुत्स्केवर जैसे दिग्गजों से तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हैं। द्वारकेश के पॉडकास्ट में निवेशक करोड़ों रु. लगाने को तैयार हैं, लेकिन वे इसे स्वतंत्र रिसर्च कंपनी या नेटवर्क की तरह नहीं चलाना चाहते। वे अपने कंटेंट की एडिटिंग खुद देखते हैं और उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे उन्हें कुछ नया सीखने को मिले। द्वारकेश जटिल तकनीकी शब्दों और मुद्दों पर घंटों बात करते हैं जहां मुख्यधारा का मीडिया अक्सर एआई को लेकर डर या सतही बातें करता है, द्वारकेश ‘क्वाड्रेटिक अटेंशन कॉस्ट’ और ‘केवी वेक्टर्स’ जैसे जटिल तकनीकी शब्दों पर घंटों बात करते हैं। प्रख्यात अर्थशास्त्री टायलर कोवेन उन्हें ‘एआई युग का नंबर-1 इतिहासकार’ बताते हैं। वे एआई के उस भविष्य की बात करते हैं, जहां मशीनें इंसान की तरह लगातार सीख सकेंगी, हालांकि वे इसके बी च आने वाली तकनीकी बाधाओं को लेकर भी सवाल उठाते हैं।



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