सागर | एक सम्मेलन में समाजसेवी मधुसूदन खेमरिया ने कहा कि सफलता का पैमाना धन नहीं, चरित्र है। उन्होंने निषादराज गुह्य और केवट के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा का मूल्य आत्मतृप्ति में है, पारिश्रमिक में नहीं। खेमरिया के अनुसार केवट ने बिना पारिश्रमिक राम, सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराई, जो निस्वार्थ सेवा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राम द्वारा केवट को भाई का दर्जा देना बताता है कि व्यक्ति का मूल्य जन्म से नहीं, कर्म और भाव की निर्मलता से तय होता है। उन्होंने छुआछूत जैसी सामाजिक दीवारें गिराने का संदेश भी दिया।
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‘केवट के आदर्श आज भी समरसता की प्रेरणा’ – Sagar News
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