Thursday, June 4, 2026
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देर रात आई ऐसी खबर, मार्केट खुलते ही दिखेगा लेंसकार्ट के शेयरों पर असर!


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आईवियर कंपनी लेंसकार्ट में जापान के दिग्गज निवेशक सॉफ्टबैंक ने अपनी 3.25 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. करीब 2,873 करोड़ रुपये की इस ब्लॉक डील के बाद कंपनी में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी घटकर 9.88 फीसदी रह गई है. इस सौदे में कई बड़े घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया है. सॉफ्टबैंक की आंशिक बिकवाली के बावजूद बाजार का भरोसा लेंसकार्ट पर कायम दिखाई दे रहा है. गोल्डमैन सैक्स, फिडेलिटी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी लाइफ जैसे बड़े निवेशकों ने इस ब्लॉक डील में हिस्सेदारी खरीदी है. इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशकों को कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है.

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हाल ही में ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल ने लेंसकार्ट को लेकर सकारात्मक रिपोर्ट जारी की थी.

नई दिल्ली. जापान के टेक निवेश दिग्गज सॉफ्टबैंक ने लेंसकार्ट में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया है. देर रात सामने आई इस बड़ी ब्लॉक डील ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और इसका असर आने वाले कारोबारी सत्र में निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दे सकता है. सॉफ्टबैंक ने लेंसकार्ट के 5.65 करोड़ शेयर बेचकर करीब 2,873 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस सौदे की औसत कीमत 508.55 रुपये प्रति शेयर रही. आपको बता दें कि बुधवार को लेंसकार्ट के शेयर एनएसई पर 1.13 चढ़कर 516.15 रुपये पर बंद हुए. इस ट्रांजैक्शन के बाद लेंसकार्ट में सॉफ्टबैंक की हिस्सेदारी 13.13 फीसदी से घटकर 9.88 फीसदी रह गई है. हालांकि यह पूरी तरह एग्जिट नहीं है, बल्कि आंशिक मुनाफावसूली है. यही वजह है कि बाजार इस डील को नकारात्मक संकेत के बजाय एक सामान्य निवेशक रणनीति के रूप में भी देख रहा है.

सॉफ्टबैंक द्वारा बेचे गए शेयरों को बाजार के कई बड़े निवेशकों ने खरीदा है. इनमें गोल्डमैन सैक्स, फिडेलिटी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड, क्वांट म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी लाइफ जैसे नाम शामिल हैं. किसी ब्लॉक डील में इतने बड़े संस्थागत निवेशकों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि लेंसकार्ट की ग्रोथ संभावनाओं को लेकर भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है.

एलारा कैपिटल की रिपोर्ट ने बढ़ाया उत्साह

हाल ही में ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल ने लेंसकार्ट को लेकर सकारात्मक रिपोर्ट जारी की थी. रिपोर्ट में कंपनी की तुलना टाटा समूह के सफल रिटेल ब्रांड तनिष्क से की गई और कहा गया कि आने वाले वर्षों में लेंसकार्ट भारतीय आईवियर बाजार का सबसे मजबूत और प्रमुख ब्रांड बन सकता है. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का ओमनीचैनल मॉडल, मजबूत ब्रांड पहचान और तेजी से बढ़ता स्टोर नेटवर्क इसे लंबी अवधि में एक मजबूत कंपाउंडर स्टॉक बना सकता है.

रेवेन्यू ग्रोथ ने निवेशकों को किया प्रभावित

कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो खर्च बढ़ने की वजह से मुनाफे में करीब 7.5 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि इसके बावजूद कंपनी के रेवेन्यू में 45 फीसदी से ज्यादा की मजबूत वृद्धि देखने को मिली. यही वजह है कि बड़े निवेशक अभी भी कंपनी की भविष्य की कमाई क्षमता को लेकर आशावादी नजर आ रहे हैं.

विदेशी कारोबार भी बन रहा बड़ी ताकत

लेंसकार्ट ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर भी जोर दिया है. ओंडेज (Owndays) और मेलर (Meller) जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक कारोबार तेजी से बढ़ा है. फिलहाल कंपनी की कुल आय में अंतरराष्ट्रीय कारोबार की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी तक पहुंच चुकी है. इससे लेंसकार्ट केवल भारतीय बाजार पर निर्भर नहीं रह गई है और उसकी ग्रोथ के नए रास्ते खुल रहे हैं.

सॉफ्टबैंक ने क्यों बेची हिस्सेदारी

सॉफ्टबैंक जैसे बड़े वेंचर निवेशकों का बिजनेस मॉडल शुरुआती दौर में निवेश करना और सही समय आने पर मुनाफा निकालना होता है. लेंसकार्ट में निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन कई गुना बढ़ चुका है. ऐसे में करीब 2,873 करोड़ रुपये की यह नकदी सॉफ्टबैंक के लिए एक सफल आंशिक एग्जिट मानी जा रही है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रकम अब नए स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.



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