Monday, June 22, 2026
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BDK अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन पर लगा ‘ताला’: मरीजों पर दोहरी मार, बाहर से 800 रुपए देकर करवानी पड़ रही है सोनोग्राफी, अस्पताल में डॉक्टर नहीं, PMO बोले अभी प्रस्ताव बनाकर भेजा – Jhunjhunu News




सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और निशुल्क जांच के दावे भले ही बड़े-बड़े किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। झुंझुनू जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल में पिछले करीब तीन-चार महीने से सोनोग्राफी जांच पूरी तरह से बंद पड़ी है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण स्टाफ की कमी के कारण यहां आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ​अस्पताल की इस व्यवस्था को लेकर ‘भास्कर’ ने वहां आए मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों का पक्ष जाना।
​मरीजों पर दोहरी मार, मुफ्त इलाज के नाम पर जेब हो रही ढीली
​ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग इस उम्मीद के साथ सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं कि उन्हें यहां निशुल्क जांच और इलाज मिल सकेगा। लेकिन बीडीके अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों द्वारा सोनोग्राफी की पर्ची तो थमा दी जाती है, पर साथ ही यह भी कह दिया जाता है कि यहां सोनोग्राफी नहीं होगी, बाहर से करवानी पड़ेगी। ​अस्पताल में जांच कराने आए मरीजों का दर्द ​ खतेहपुरा निवासी सरोज ने बताया कि वह सोनोग्राफी करवाने के लिए अस्पताल आई थीं, लेकिन यहां आकर पता चला कि मशीन बंद है। उन्हें बाहर से जांच करवाने के लिए कहा गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को बेहद परेशानी हो रही है। ​बोई गांव से बुजुर्ग ने बताया कि वे अपनी गुड़िया की तबीयत खराब होने पर उसे दिखाने आए थे। डॉक्टर ने सोनोग्राफी लिख तो दी, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन निजी सेंटर जाना पड़ा। जहां उन्हें कम से कम 800 रुपए देकर सोनोग्राफी करवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्था से आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ​गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान के लिए सोनोग्राफी बेहद जरूरी होती है।
​ क्यों बंद है व्यवस्था, इस पर PMO बोले
​इस पूरे मामले पर बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने अस्पताल का पक्ष रखते हुए बताया कि स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है: ​सोनोग्राफी विभाग के लिए हमारे पास रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। इसके लिए बाकायदा प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवा दिया गया है। पूर्व में यहां एक चिकित्सक का पदस्थापन (पोस्टिंग) किया भी गया था, लेकिन उनका पीजी (Post Graduation) में चयन हो जाने के कारण वे जयपुर चले गए। फिलहाल हमने नवीन पदस्थापन के तहत नए स्टाफ की डिमांड भेजी है और पूरी संभावना है कि आगामी दिनों में यहां पदस्थापन होते ही व्यवस्था को सुचारू कर दिया जाएगा।



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