भागलपुर में सैंडिस कंपाउंड से दो पुराने पेड़ के जीवाश्म को जिला प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित कर दिया गया। जीवाश्मों का प्राथमिक संरक्षण पूरा कर लिया गया है और इनके वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनका अध्ययन भागलपुर और आसपास के क्षेत्र के प्राचीन प्राकृतिक इतिहास और भू-वैज्ञानिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है। जानकारी के अनुसार जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन को मॉर्निंग वॉक के दौरान सैंडिस कंपाउंड में दो पत्थरनुमा संरचनाएं दिखाई दीं। उनकी बनावट सामान्य पत्थरों से अलग होने पर उन्होंने संदेह के आधार पर विभिन्न कोणों से तस्वीरें लेकर उन्हें डॉ. अतुल आदित्य पाण्डेय को भेजीं। प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञ ने इन्हें संभावित वृक्ष जीवाश्म बताया और इनके संरक्षण की सलाह दी। इसके बाद संग्रहालय एवं पुरातत्व निदेशालय और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई। परीक्षण के बाद प्रजाती और उम्र का पता चलेगा जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद दोनों जीवाश्मों को सावधानीपूर्वक सैंडिस कंपाउंड से हटाकर भागलपुर संग्रहालय लाया गया, जहां उनका प्राथमिक संरक्षण कर सुरक्षित संग्रह में रखा गया। संग्रहालय प्रशासन के अनुसार, इन्हें आम दर्शकों के अवलोकन के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। अंकित रंजन ने बताया कि जीवाश्मों के विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण के लिए बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज़ से औपचारिक अनुरोध किया गया है। परीक्षण के बाद जीवाश्मों की अनुमानित आयु, वृक्ष की प्रजाति, भूवैज्ञानिक काल और अन्य वैज्ञानिक विशेषताओं का निर्धारण किया जाएगा।
संग्रहालय प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद जीवाश्मों से संबंधित विस्तृत जानकारी संग्रहालय में प्रदर्शित की जाएगी, ताकि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों को इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर के अध्ययन का अवसर मिल सके।
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