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Rooftop Farming Success Story: भोजपुर के शिवपुर गांव निवासी रणवीर सिंह ने बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए घर की छत पर ही रूफ फार्मिंग शुरू कर दी. थर्माकोल के डिब्बों में बिना केमिकल दर्जनों सब्जियां उगा रहे हैं. भोजपुर के शिवपुर गांव निवासी रणवीर सिंह ने बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए घर की छत पर ही रूफ फार्मिंग शुरू कर दी. थर्माकोल के डिब्बों में बिना केमिकल दर्जनों सब्जियां उगा रहे हैं. देखें ये देसी जुगाड़.
भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले शिवपुर गांव के निवासी रणवीर कुमार सिंह ने बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा और रोजमर्रा की परेशानियों को अपने लिए एक नया अवसर बना लिया है. हर साल बाढ़ आने के कारण क्षेत्र में आवागमन के साधन पूरी तरह बाधित हो जाते हैं. जिससे ग्रामीणों को बाजार तक पहुंचकर जरूरत का सामान या सब्जियां लाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. पैसे होने के बावजूद समय पर बाजार न पहुंच पाने की इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए रणवीर सिंह ने खुद ही एक अनूठा रास्ता निकाला और अपने घर की छत पर ही ‘रूफ फार्मिंग’ की शुरुआत कर दी, ताकि उनके परिवार को ताजी और शुद्ध सब्जियां घर पर ही मिल सकें. भोजपुर के शिवपुर गांव निवासी रणवीर सिंह ने बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए घर की छत पर ही रूफ फार्मिंग शुरू कर दी. थर्माकोल के डिब्बों में बिना केमिकल दर्जनों सब्जियां उगा रहे हैं.
थर्माकोल के डिब्बे और जैविक खाद
पारंपरिक प्लास्टिक के बक्से महंगे पड़ते हैं और एक-दो साल में खराब हो जाते हैं, इसलिए रणवीर सिंह ने खेती के लिए थर्माकोल के मछली वाले पुराने डिब्बों का उपयोग किया है जो पांच से छह साल तक आसानी से चलते हैं.इन डिब्बों में आधा हिस्सा सड़े हुए गोबर की खाद और दो हिस्सा साफ मिट्टी मिलाकर एक बेहतरीन मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके अलावा, छत पर प्लास्टिक की पाइप और बांस के सहारे एक मजबूत मचान तैयार किया गया है, जिस पर लता वाली सब्जियां फैली हुई हैं. इस पूरी खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक खादों या उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि पूरी तरह से प्राकृतिक गोबर की खाद का प्रयोग किया जाता है जिससे सब्जियों का स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहद शानदार मिलते हैं.
छत पर उगने वाली दर्जनों प्रकार की सब्जियां
रणवीर सिंह अपनी छत पर जुलाई से लेकर मार्च तक यानी लगभग छह महीने तक विभिन्न प्रकार की मौसमी सब्जियां उगाते हैं, जबकि इसके बाद मार्च से जुलाई के बीच वे नीचे जमीन पर खेती करते हैं.उनकी छत पर वर्तमान में करेली यानी करैला मुख्य रूप से उगाया जाता है जिसका स्वाद इतना बेहतरीन होता है कि लोग कच्चा भी खा लें तो तीखापन महसूस नहीं होता. इसके अलावा उनकी छत पर लत्तर वाला बोरो यानी बरबटी, सेम, बैंगन, टमाटर, हरी मिर्च और ठंड के मौसम में गोभी तथा शिमला मिर्च जैसी दर्जनों फसलें उगाई जाती हैं.
आर्थिक बचत और समाज के लिए प्रेरणा
रणवीर सिंह बताते हैं कि पिछले तीन सालों से उन्हें बाजार से सब्जियां खरीदने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी है, जिससे उनका घरेलू बजट काफी संभल गया है. आरा से लेकर आसपास के गांवों तक में जितने भी उनके रिश्तेदार या जुड़े हुए लोग हैं, जब भी छत पर फसल तैयार होती है, वे उनके घरों तक भी सब्जियां जरूर पहुंचाते हैं. बाढ़ और महंगाई के इस दौर में रणवीर सिंह की यह छत की खेती न सिर्फ उनके परिवार के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि आसपास के अन्य लोगों के लिए भी आत्मनिर्भर बनने की एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन गई है.
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