Wednesday, July 29, 2026
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एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, किसको होगा फायदा, जानिए


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Airport Rules to Change : देश के एयरपोर्ट और एविएशन सेक्‍टर में सुधार करने को बनी एक समिति ने कई सुझाव सरकार को दिए हैं. इन सुझावों पर अगर अमल होता है तो एयरपोर्ट और एयरलाइंन कंपनियों को तो फायदा होगा ही, इससे यात्रियों और एयरपोर्ट पर बिजनेस करने वालों को भी लाभ होगा.

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समिति ने ब्रिटेन के हीथ्रो एयरपोर्ट और आयरलैंड के डबलिन एयरपोर्ट की तरह ही भारत में रेवेन्यू-कैप मॉडल लागू करने का सुझाव दिया है.

नई दिल्ली. देश के एयरपोर्ट और एविएशन सेक्टर को नई ऊंचाइयों देने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अध्यक्षता वाले एक उच्चस्तरीय सरकारी पैनल ने एयरपोर्ट्स के पुराने और सख्‍त नियमों को समाप्‍त कर नए और आसान रूल्‍स लागू करने की सिफारिश की है. अगर ये सिफारिशें मानी जाती हैं तो एविएशन सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है. नए नियम लागू होने से हवाई सफर सस्‍ता हो सकता है. एयरलाइंस का खर्च भी घट सकता है और एयरपोर्ट्स पर बिजनेस करना भी आसान हो सकता है. एयरपोर्ट के आसपास ऊंची इमारतें बनाने को एनओसी लेना भी आसान हो जाएगा.

समिति ने भारत की मौजूदा आइटम-वार एयरपोर्ट टैरिफ प्रणाली की जगह तीन श्रेणियों वाली सरल टैरिफ व्यवस्था अपनाने की सिफारिश की है. इसे पिछले कई वर्षों में एयरपोर्ट टैरिफ नियमन में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है. फिलहाल एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) एयरपोर्ट पर दी जाने वाली हर सेवा के लिए अलग-अलग शुल्क तय करती है. इसमें लैंडिंग फीस, पार्किंग चार्ज और यूजर डेवलपमेंट फीस जैसी सेवाएं शामिल हैं. कमेटी ने का कहना है कि हर सेवा का अलग-अलग टैरिफ तय करने के बजाय इन्हें केवल तीन बड़ी कैटेगरी, लैंडिंग और पार्किंग शुल्क, यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) और अन्य एयरपोर्ट सेवा शुल्क, में ही रखा जाए.

एयरपोर्ट ऑपरेटरों को मिले ज्‍यादा आजादी

समिति का मानना है कि मौजूदा बहुत सख्‍त है. इस वजह से एयरपोर्ट ऑपरेटर यात्रियों और एयरलाइंस को आकर्षित करने के लिए रूट इंसेंटिव, वॉल्यूम डिस्काउंट या सीजनल प्राइसिंग जैसी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाते. समिति ने ब्रिटेन के हीथ्रो एयरपोर्ट और आयरलैंड के डबलिन एयरपोर्ट की तरह ही भारत में रेवेन्यू-कैप मॉडल लागू करने का सुझाव दिया है. इस मॉडल में नियामक केवल कुल राजस्व की सीमा तय करता है, जबकि शुल्क किस प्रकार तय किए जाएं, इसका निर्णय एयरपोर्ट ऑपरेटर स्वयं लेते हैं. ऐसा होने पर यात्रियों को ज्‍यादा डिस्‍काउंट दिया जा सकेगा.

एयरपोर्ट पर बिजनेस हो आसान

एयरपोर्ट के अंदर नई दुकानें, रेस्तरां या लाउंज खोलने के लिए एयरपोर्ट ऑपरेटर को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से अनुमति लेनी पड़ती है. समिति ने इस प्रक्रिया मे बदलाव की सिफारिश की है. समिति का मानना है कि वर्तमान प्रक्रिया के कारण अनावश्यक देरी होती है. इ‍सलिए सेल्‍फ सर्टिफिकेशन को अपनाया जाना चाहिए.

एयरलाइंस कंपनियों को मिले ज्‍यादा छूट

समि‍ति ने सुझाव दिया है कि जिस एयरलाइंस के पास स्वयं की ग्राउंड हैंडलिंग क्षमता है, उन्हें उन एयरपोर्टों पर अन्य एयरलाइंस को भी यह सेवा देने की अनुमति दी जाए, जहां पहले से कम-से-कम दो अन्य ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां कार्यरत हों. समिति का मानना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राउंड सर्विस का खर्च कम होगा.

दो साल के लिए मिले विदेशी पायलटों को मंजूरी

समिति ने विदेशी पायलटों के लिए मिलने वाली मंजूरी (FATA) की वैधता अब 1 साल से बढ़ाकर 2 साल करने का सुझाव दिया है. अगर यह मांग मान ली जाती है तो इससे एयरलाइंस में पायलटों की कमी दूर होगी और बार-बार कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी.

इमारतों के लिए NOC हो ऑटोमेटेड

समिति की एक अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश एयरपोर्ट के आसपास बनने वाली इमारतों के लिए हाइट नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (Height NOC) से जुड़ी है. समिति ने सुझाव दिया है कि जो इमारत नियमों के अनुसा बनी है, उसे उसे एनओसी देने के लिए ऑटोमेटेड प्रणाली लागू की जाए. ऐसा होने पर इससे बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरे करने में निश्चितता मिलेगी और एयरपोर्ट के पास रियल एस्टेट का तेजी से विकास होगा.

ड्रोन इंडस्ट्री

समिति ने सरकार को 30 किलोग्राम तक के छोटे और कम जोखिम वाले ड्रोन के लिए भी ‘ऑटो-सर्टिफिकेशन’ व्यवस्था का प्रस्ताव है. परीक्षण के बाद तुरंत मंजूरी मिलने से देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.



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