राजस्थान में इस बार कमजोर मानसून ने प्रदेशवासियों की चिंता बढ़ा दी है। औसत से भी कम बारिश के चलते 693 में से 246 बांध पूरी तरह सूखे पड़े हैं। केवल 15 बांध ही पूरी तरह भर पाए हैं। शेष 432 बांधों के हालात भी ज्यादा अच्छे नहीं हैं। पिछली बारिश में पूरी तरह भरे इन बांधों में अब तक औसत 35 फीसदी पानी खर्च हो चुका है। जयपुर-अजमेर जैसे 4 जिलों की लगभग 1.16 करोड़ आबादी की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में इस बार एक इंच भी पानी नहीं आया है। मौसम विभाग की अगस्त और सितंबर में बारिश को लेकर की गई भविष्यवाणी भी राहत देने वाली नहीं है। कम बरसात के कारण 23 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में जल संसाधन मंत्री मंत्री सुरेश रावत ने खुद माना कि अधिकतर बांधों में पानी की कमी से वाटर मैनेजमेंट की जरूरत पड़ेगी। किसानों की समस्या पर उन्होंने कहा- पानी नहीं आ रहा है। पढ़िए- प्रदेश के बांधों में क्या है स्थिति जयपुर, जोधपुर सहित सभी जगह के बांधों में घट गया पानी जल संसाधन विभाग ने राजस्थान के बांधों को 6 जोन में बांटा हुआ है। पानी की आवक के आंकड़े देखें, तो जोधपुर जोन के बांधों के हालात सबसे ज्यादा खराब है। बीसलपुर के कारण बढ़ी चिंता राजस्थान में मानसून 2 जुलाई के बाद सक्रिय हुआ। तब से अब तक की स्थिति देखें, तो जयपुर और अजमेर के लिए सबसे जरूरी बीसलपुर बांध है। इसमें पानी का स्तर एक इंच भी नहीं बढ़ा है। जबकि पिछले मानसून में अगस्त के शुरुआती दौर में ही बांध लबालब भर गया था। हालात ये हैं कि अभी बांध करीब 35 फीसदी पानी कम हो चुका है। केवल 15 बांध भरे हैं जल संसाधन विभाग ने बांधों को जल भराव की क्षमता के अनुसार दो हिस्सों में बांटा हुआ है। एक 4.25 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा क्षमता वाले बांध और दूसरा, 4.25 मिलियन क्यूबिक मीटर से कम क्षमता वाले बांध। प्रदेश में कुल 693 बांध हैं, उनमें से 246 पूरी तरह खाली पड़े हैं। वहीं, 432 बांध आंशिक भरे हुए हैं। केवल 15 बांध ही ऐसे हैं, जिन्हें पूरा भरा माना जा सकता है। इसमें भी 75 फीसदी छोटे बांध हैं। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हाल खराब राजस्थान में पिछले साल मानसून काफी मेहरबान था। इस कारण बांध छलक उठे थे। पिछले साल के मानसून में 4 अगस्त तक के हालातों की तुलना इस मानसून से करें, तो सभी बांधों का हाल खराब है। बारिश का पानी नहीं आने के कारण जल स्तर घट रहा है।यदि मानसून पहले महीने की तरह बचे दिनों में भी कुछ रूठा रहा, तो जयपुर, जोधपुर, भरतपुर सहित लगभग सभी जगह पानी का संकट खड़ा हो सकता है। इन हालातों में ज्यादा प्रभावित किसान होंगे, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत से बातचीत सवाल : अभी तक मानसून का दौर कमजोर है, बांधों की क्या स्थिति है? जवाब : अभी तक जो मानसून आया है, वह काफी कमजोर रहा है, निश्चित रूप से अभी अधिकतर बांध खाली हैं। सवाल : क्या इससे अगली गर्मियों में पीने के पानी का संकट नहीं गहराएगा? जवाब : ऐसा नहीं है कि पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। अगली गर्मियों तक के लिए पीने के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था है। कोई परेशानी नहीं आने वाली है। सवाल : सिंचाई के पानी को लेकर सभी किसान चिंता कर रहे हैं। जवाब : बरसात तो अभी तक बहुत कम आई है, पानी कहां से आएगा। जब भी बरसात नहीं आती किसान परेशान होता ही है। जब बांध ही खाली हैं, बरसात का पानी आ नहीं रहा, तो पानी देंगे कहां से, उनकी परेशानी भी लाजिमी है। सवाल : किसानों की इस आशंका को दूर करने के लिए सरकार के पास क्या उपाय हैं? जवाब : सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ है। हम वाटर मैनेजमेंट करके जितना अधिक किसानों को पानी दे सकते हैं, देंगे। हालांकि मानसून का दौर अभी चल रहा है। विभाग की पूरी तैयारी है। सामान्य से भी कम बारिश, 23 जिलों में सूखे जैसे हालात राज्य में मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। जून में प्री-मानसून के दौरान बारिश सामान्य रही। लेकिन 31 जुलाई तक सामान्य से 11 फीसदी कम बरसात हुई है। 23 जिलों में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के सीनियर साइंटिस्ट हिमांशु शर्मा ने बताया- इस बार प्रशांत महासागर में अलनीनो कंडीशन और हिंद महासागर में बना इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी न्यूट्रल कंडीशन ने मानसून को कमजोर किया है। मौसम विज्ञान केन्द्र, नई दिल्ली के अनुसार राजस्थान में आगे अगस्त-सितंबर अच्छी बारिश के कोई संकेत नहीं है। मान्य से कम बारिश का अनुमान है।
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