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MP 5 Famous Food: मध्य प्रदेश घूमने जाएं तो इंदौर का पोहा, भोपाल का सुल्तानी स्वाद और दाल-बाफला तो आसानी से मिल जाएगा, लेकिन असली मजा कई बार उन पकवानों में छिपा होता है, जिनका नाम बड़े शहरों के मेन्यू तक नहीं पहुंच पाया. प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों में आज भी मौसम, स्थानीय अनाज और घर में मौजूद सामान से ऐसी डिश तैयार होती हैं, जो स्वाद के साथ पुरानी रसोई की कहानी भी सुनाती हैं. कुछ पकवान इतने साधारण हैं कि पहली नजर में खास नहीं लगते, लेकिन पहला निवाला लेते ही अंदाजा हो जाता है कि देसी खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही पाक कला भी है. आइए जानते हैं मध्य प्रदेश की ऐसी ही पांच कम चर्चित देसी डिश के बारे में.
इन देसी पकवानों में छिपा है एमपी का असली स्वाद 1. भुट्टे का कीस मालवा की रसोई से निकला भुट्टे का कीस अब धीरे-धीरे मशहूर जरूर हो रहा है, लेकिन प्रदेश के बाहर अभी भी बहुत से लोग इससे अनजान हैं. ताजे भुट्टे को कद्दूकस करके दूध, मसालों और हल्के तड़के के साथ पकाया जाता है. इसका स्वाद हल्का मीठा, मसालेदार और बेहद मुलायम होता है. बारिश के मौसम में गर्मागर्म भुट्टे का कीस खास तौर पर पसंद किया जाता है. (Image-AI generated)
2. मुठिया मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में मुठिया घरेलू नाश्ते या हल्के भोजन के तौर पर बनाई जाती है. आटे या दूसरे स्थानीय अनाज के मिश्रण से तैयार इस व्यंजन को भाप में पकाकर फिर तड़का दिया जाता है. अलग-अलग इलाकों में इसकी सामग्री और बनाने का तरीका थोड़ा बदल जाता है. यही इसकी खासियत भी है एक नाम, लेकिन कई स्थानीय स्वाद. (Image-AI generated)
3. दाल पिट्ठी नाम सुनकर यह साधारण लग सकती है, लेकिन दाल पिट्ठी देसी खाने का ऐसा उदाहरण है जिसमें कम सामग्री में भरपूर स्वाद मिलता है. आटे की छोटी-छोटी लोइयों या टुकड़ों को मसालेदार दाल में पकाया जाता है. गांवों में यह व्यंजन खासकर तब याद आता है, जब घर में कुछ अलग लेकिन पेट भरने वाला बनाने का मन हो. (Image-AI generated)
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4. कढ़ी-फुलकी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बनने वाली कढ़ी-फुलकी आम कढ़ी से थोड़ी अलग पहचान रखती है. खट्टी-मीठी या मसालेदार कढ़ी में आटे की छोटी फुलकियां डालकर इसे पकाया जाता है. गर्म चावल के साथ इसका स्वाद बेहद देसी और संतोष देने वाला लगता है. कई परिवारों में इसे आज भी पारंपरिक घरेलू भोजन की तरह बनाया जाता है. (Image-AI generated)
5. लस्सी नहीं, देसी मट्ठे वाली कढ़ी मालवा और निमाड़ की गर्मी में छाछ या मट्ठे का इस्तेमाल सिर्फ पेय के रूप में नहीं होता. इससे बनने वाली देसी मट्ठे की कढ़ी कई ग्रामीण घरों की पसंद है. इसमें बेसन, मसाले और मट्ठे का इस्तेमाल होता है और कई जगह इसमें स्थानीय सब्जियां या पकौड़ी भी डाली जाती हैं. चूल्हे पर धीमी आंच में पकने के बाद इसका स्वाद और भी निखर जाता है. (Image-AI generated)
शहरों के मेन्यू से दूर, घरों में आज भी जिंदा इन पकवानों की सबसे दिलचस्प बात यही है कि इनकी पहचान किसी बड़े रेस्तरां या फूड चेन से नहीं बनी. ये रेसिपी दादी-नानी की रसोई, गांव की चौपाल और मौसम के हिसाब से बदलती घरेलू थाली से आगे बढ़ी हैं. यही वजह है कि एक ही डिश का स्वाद अलग जिले में पहुंचते ही बदल सकता है. (Image-AI generated)

