मधुबनी: मिथिलांचल के गांवों में आज भी देसी खान-पान की अपनी खास पहचान है. यहां लोग पारंपरिक व्यंजनों को बड़े चाव से खाते हैं. इन्हीं में से एक है सतंजा रोटी. इसे सात अनाज से तैयार किया जाता है. इसे कई जगह मोटी रोटी के नाम से भी जाना जाता है. सतंजा रोटी को खासतौर पर गांवों में रात के खाने में बनाया जाता है. इसे गरमागरम रोटी के रूप में खाया जाता है. साथ में सिलबट्टे पर पिसी मिर्च की चटनी, प्याज, हरी मिर्च, नमक और तेल का स्वाद लिया जाता है. इसके साथ अचार भी परोसा जाता है.
गांव के डिनर का देसी फ्लेवर
अगर आप गांव से हैं तो सतंजा रोटी के बारे में जरूर जानते होंगे. अगर नहीं हैं तो अब जान लीजिए. देश के हर इलाके के खान-पान की अपनी खास पहचान होती है. कहीं रोटी-चटनी पसंद की जाती है तो कहीं दूसरे पारंपरिक व्यंजन. मिथिलांचल में सतंजा रोटी इसी देसी स्वाद का हिस्सा है. सतंजा रोटी सात प्रकार के अनाज को मिलाकर बनाई जाती है. इसे बनाने का तरीका ज्यादा मुश्किल नहीं है. हालांकि, इसका आटा तैयार करने में थोड़ी मेहनत जरूर लगती है.
सात अनाज से बनता है आंटा
इसके लिए चावल, दाल, गेहूं समेत अलग-अलग अनाज लिए जाते हैं. अनाज को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद उन्हें धोकर सुखाया जाता है. फिर इन्हें भूनकर पीसा जाता है. इस तरह सात अनाज का आटा तैयार होता है. इसी आटे से सतंजा रोटी बनाई जाती है. आजकल बाजार में सतंजा रोटी का तैयार आटा भी आसानी से मिल जाता है. ऐसे में लोग इसे घर पर भी आसानी से बना सकते हैं.
गरम रोटी के साथ मिर्च की चटनी का स्वाद
सतंजा रोटी का असली स्वाद इसे गरमागरम खाने में आता है. आटा तैयार होने के बाद उसे गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसके बाद आटे की मोटी रोटी तैयार की जाती है. इस रोटी को तवे पर तेज आंच में सेंका जाता है. रोटी दोनों तरफ से अच्छी तरह पकाई जाती है. इसके बाद इसे कच्चे प्याज, हरी मिर्च, नमक और तेल के साथ खाया जाता है. कई लोग प्याज, हरी मिर्च और नमक को सिलबट्टे पर पीसकर इसकी चटनी बनाते हैं. इस चटनी के साथ गर्म सतंजा रोटी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. साथ में अचार भी खाया जाता है.
सात अनाज से बनती है मोटी रोटी
सतंजा रोटी में चावल, गेहूं, मक्का, चूड़ा, दाल और चना समेत सात तरह के अनाज का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कुछ अनाज कच्चे और कुछ भुने हुए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. सभी अनाज का आटा तैयार करने के बाद उसे गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसके बाद आटे की लोई बनाकर उसे हाथों से थपथपाया जाता है. गांवों में इसे दोनों हाथों से ताली पीट-पीटकर मोटा और गोल आकार दिया जाता है. इसके बाद रोटी को गर्म तवे पर तेज आंच में पकाया जाता है. अच्छी तरह सिकने के बाद इसे गरम ही परोसा जाता है. ऊपर से थोड़ा तेल लगाकर प्याज, हरी मिर्च और नमक के साथ खाने पर इसका स्वाद काफी बढ़ जाता है.
खेत में काम करने वालों की पसंदीदा
मिथिलांचल के गांवों में सतंजा रोटी का इस्तेमाल केवल रात के खाने तक सीमित नहीं रहा है. पहले जब लोग खेतों में काम करने या दूर जाने के लिए निकलते थे, तब भी वे इसे अपने साथ ले जाते थे. इसकी एक वजह यह भी थी कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता था. साथ ही यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने वाला भोजन माना जाता है. इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती थी. इसलिए मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह सुविधाजनक भोजन भी था.
पारंपरिक और पौष्टिक भोजन
सात तरह के अनाज से बनने के कारण इसे पारंपरिक और पौष्टिक भोजन के रूप में भी देखा जाता है. अलग-अलग अनाज शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं. हालांकि, किसी भी भोजन के पोषण संबंधी लाभ व्यक्ति की जरूरत और मात्रा पर निर्भर करते हैं. आज के समय में भी मिथिलांचल के कई गांवों में सतंजा रोटी की परंपरा बनी हुई है. बाजार में इसका आटा उपलब्ध होने से इसे बनाना और भी आसान हो गया है. अगर आप भी देसी और पारंपरिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो सतंजा रोटी को घर पर बनाकर हरी मिर्च की चटनी और प्याज के साथ जरूर आजमा सकते हैं.

