Tuesday, August 18, 2026
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शहद असली है या चीनी की मिलावट? 2 आसान टेस्ट से तुरंत पकड़ें नकली शहद


शहद को अक्सर प्राकृतिक मिठास और सेहत से जुड़े फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले शहद की शुद्धता को लेकर सवाल भी उठते रहते हैं. कई बार इसमें चीनी या गुड़ से बने पदार्थों की मिलावट की आशंका रहती है. ऐसे में सिर्फ शहद का रंग, गाढ़ापन या स्वाद देखकर यह तय करना मुश्किल है कि वह पूरी तरह शुद्ध है या नहीं.

यहां दिए गए टेस्टिंग में कुछ रासायनिक परीक्षणों के जरिए शहद में चीनी या गुड़ की मौजूदगी का संकेत पता किया जा सकता है…

पहला तरीका – फिएहे परीक्षण

शहद में चीनी या गुड़ की मिलावट की जांच के लिए फिएहे परीक्षण का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें सबसे पहले 5 मिलीलीटर शहद लिया जाता है और उसमें 5 मिलीलीटर ईथर मिलाया जाता है. दोनों को अच्छी तरह मिलाने के बाद मिश्रण को कुछ देर स्थिर रहने दिया जाता है, ताकि ईथर की परत अलग हो सके.

इसके बाद ईथर की परत को पेट्री डिश में निकालकर ईथर को पूरी तरह उड़ाया जाता है. अब इसमें 2 से 3 मिलीलीटर रेसॉर्सिनॉल मिलाया जाता है. दिए गए परीक्षण में रेसॉर्सिनॉल का घोल 5 मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड में 1 ग्राम रेसॉर्सिनॉल मिलाकर तैयार करने का उल्लेख है.

अगर इस प्रक्रिया के बाद लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी या गुड़ की उपस्थिति का संकेत माना जाता है. यानी यह टेस्ट मिलावट की आशंका की ओर इशारा कर सकता है.

दूसरा तरीका – एनिलीन क्लोराइड परीक्षण

दूसरा तरीका एनिलीन क्लोराइड परीक्षण है. इसके लिए 5 मिलीलीटर शहद लिया जाता है. इसमें एनिलीन क्लोराइड घोल मिलाया जाता है. दिए गए तरीके के अनुसार यह घोल 3 मिलीलीटर एनिलीन और 1:3 अनुपात में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के 7 मिलीलीटर से तैयार किया जाता है.

शहद और इस घोल को अच्छी तरह मिलाने के बाद रंग में बदलाव देखा जाता है. अगर मिश्रण में चमकीला लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी के अपमिश्रण का संकेत माना जाता है.

सिर्फ रंग देखकर फैसला न करें

हालांकि ऐसे रासायनिक परीक्षण मिलावट की शुरुआती जांच में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें शहद की शुद्धता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए. खासतौर पर ईथर, सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एनिलीन जैसे रसायनों के साथ किए जाने वाले परीक्षण घर पर बिना उचित जानकारी और सुरक्षा के नहीं करने चाहिए. इनके इस्तेमाल में त्वचा, आंखों और सांस से जुड़ा जोखिम हो सकता है.



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