Tuesday, August 25, 2026
Homeबिज़नेसबांग्लादेश ने शुरू की भारत से बात, कारोबार सामान्य हुए तो किसे...

बांग्लादेश ने शुरू की भारत से बात, कारोबार सामान्य हुए तो किसे होगा फायदा


नई दिल्ली. करीब 2 साल से भारत के खिलाफ जहर उगलने और पाकिस्तान से गलबहियां करने के बाद बांग्लादेश ने अपना रुख बदल दिया है. भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा एवं जूट मंत्री खांडकर अब्दुल मुक्तादिर से मुलाकात की और द्विपक्षीय आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए दोनों देशों के बीच कारोबार को बढ़ाने पर सहमति बनती दिखी. अगर दोनों देशों के बीच दोबारा व्यापारिक रिश्ते सामान्य होते हैं तो इसका फायदा किसे ज्यादा मिलेगा.

भारत और बांग्लादेश के बीच कारोबार के आंकड़े और उससे होने वाले नफा-नुकसान की पड़ताल करने से पहले आपको यह बताते हैं कि हमारे पड़ोसी देश ने पिछले 2 साल से क्यों जहर उगलना शुरू किया और इसका क्या असर हुआ. बांग्लादेश ने भारत से दूरी तो राजनीतिक कारणों से बनाई थी, लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से दिखा. हमारी सीमाएं जुड़ने की वजह से बांग्लादेश के लिए ज्यादातर सामान खरीदना आसान होता रहा है, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण उसने कई चीजों की खरीदारी बंद कर दी. पाकिस्तान और चीन के झांसे में आकर बांग्लादेश ने भारत से कई सामान का आयात बंद किया और कुछ पर भारत ने खुद पाबंदी लगा दी. असर ये हुआ कि ग्लोबल मार्केट के बढ़ते दबाव में बांग्लादेश आर्थिक रूप से काफी परेशान हो गया. यही वजह है कि अभी तक भारत के साथ बातचीत से दूरी बनाने वाले बांग्लादेश ने इस बार खुद अपनी तरफ से कदम बढ़ाया है.

भारत का पलड़ा होगा भारी
बांग्लादेश के साथ कारोबार में भारत का पलड़ा हमेशा भारी रहा है. 2 साल पहले जब सबकुछ सामान्य था, तो वित्तवर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल करीब 13.7 अरब डॉलर (1.31 लाख करोड़ रुपये) का करोबार हुआ था. इसमें से भारत ने 11.38 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि 2.33 अरब डॉलर का आयात किया था. इसका मतलब है कि भारत का कारोबार सरप्लस करीब 9 अरब डॉलर का रहा था. जाहिर है कि अगर कारोबारी रिश्ते दोबारा सामान्य होते हैं तो भारत ही फायदे में रहेगा. भारत से ज्यादातर कपास, ईंधन, वाहन, अनाज और मशीनरी का निर्यात होता है. दूसरी ओर, बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़े, फाइबर, जूट के धागे और चमड़े के जूतों का आयात करता है.

क्यों फायदे में रहेगा भारत
बांग्लादेश भले ही एशिया का छोटा सा देश है, लेकिन भारत के लिए वह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदारी है. भारतीय उत्पाद का इस्तेमाल सिर्फ बांग्लादेश के घरेलू बाजार में ही नहीं होता है, बल्कि उसके निर्यात के लिए कच्चे माल के तौर पर हमारे उत्पादों का काफी इस्तेमाल होता है. हमारे यहां से जाने वाले कपास, धागे, रसायन, मशीनरी और ईंधन का इस्तेमाल बांग्लादेश की गार्मेंट फैक्ट्रियों में होता है. इनसे फाइनल प्रोडक्ट तैयार करके बांग्लादेश निर्यात करता है. लिहाजा अगर कारोबार सामान्य होता है तो भारत का निर्यात 12 से 14 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

बांग्लादेश को भी जमकर फायदा
वैसे तो बांग्लादेश की सबसे बड़ी समस्या भारत के साथ व्यापार घाटा है. वित्तवर्ष 2025 में तो उसे करीब 9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. बावजूद इसके रिश्ते सामान्य होते हैं तो बांग्लादेश को कच्चे माल, खाने-पीने के सामान और औद्योगिक सामानों की सप्लाई को लेकर काफी फायदा होगा. बाजार एक्सपर्ट का तो यह भी अनुमान है कि दोनों देशों का अतिरिक्त कारोबार 25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. हालिया घटनाक्रम को देखें तो भारत ने 25 अगस्त को गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिए हैं. बांग्लादेश में इन दोनों ही उत्पादों की काफी मांग रहती है. ऐसे में अगर व्यापारिक रिश्ते सामान्य होते हैं तो यह भारत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.

जूट उद्योग को कितना फायदा
भारत भले ही ज्यादातर सामान बांग्लादेश को निर्यात करता है, लेकिन जूट के मामले में वह खरीदार ही बना हुआ है. भारत ने साल 2024 तक भारत से करीब 1.28 लाख टन जूट खरीदा था, जिसकी कीमत करीब 87 करोड़ डॉलर है. भारत में भले ही पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में भारी मात्रा में जूट का उत्पादन होता है लेकिन यह उसकी खपत का काफी कम हिस्सा है. यही वजह है कि भारतीय जूट उद्योग को ऊंची कीमत पर इसे आयात करना पड़ रहा है. बांग्लादेश के साथ कारोबारी रिश्ते सामान्य होते हैं तो भारत को वहां से कम कीमत पर जूट की सप्लाई हो सकेगी. इस बार भारत का आयात करीब 2 लाख टन तक जा सकता है.



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments