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ग्रेटर नोएडा. एक छोटी सी दुकान, एक कड़ाही और महज 12 लीटर दूध से शुरू हुआ मिठाई का कारोबार आज हजारों ग्राहकों की पसंद बन चुका है. साल 2010 में शुरू हुआ नवी कलाकंद अब ग्रेटर नोएडा के चर्चित मिठाई कारोबारों में शामिल है. यहां का कलाकंद खाने के लिए दिल्ली-NCR के अलावा दूसरे शहरों से आने वाले लोग भी पहुंचते हैं.
ग्रेटर नोएडा. शहर में मिठाइयों के शौकीनों के बीच कुछ दुकानों की अपनी अलग पहचान होती है. ग्रेटर नोएडा की नवी कलाकंद भी ऐसी ही एक दुकान है, जिसने करीब डेढ़ दशक पहले बेहद छोटे स्तर से शुरुआत की थी. साल 2010 में किराए की दुकान और सिर्फ एक कड़ाही से शुरू हुआ कारोबार आज ग्राहकों के बीच अपनी खास पहचान बना चुका है. यहां का कलाकंद खाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के अलावा दूसरे शहरों और विदेशों से आने वाले लोग भी पहुंचते हैं.
दुकान संचालक राहुल सिंह बिसोया बताते हैं कि नवी कलाकंद की शुरुआत उनके पिता ने 2010 में की थी. उस समय दुकान किराए की थी और रोजाना करीब 12 लीटर दूध से मिठाइयां तैयार की जाती थीं. शुरुआत में कारोबार छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे स्वाद और गुणवत्ता के कारण ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. राहुल के मुताबिक, परिवार ने मिठाई बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया. ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया और कारोबार भी लगातार आगे बढ़ता रहा.
सालों तक किराए की दुकान से कारोबार चलाने के बाद अब परिवार ने उसी दुकान के सामने अपनी खुद की नई दुकान शुरू की है. संचालक इसे वर्षों की मेहनत और ग्राहकों के भरोसे का परिणाम बताते हैं. उनका कहना है कि कारोबार के सफर में कई बदलाव आए, लेकिन मिठाई की गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद को बनाए रखने पर हमेशा जोर दिया गया.
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नवी कलाकंद की सबसे लोकप्रिय मिठाइयों में कलाकंद का नाम सबसे ऊपर आता है. इसके अलावा सावन और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के दौरान घेवर की मांग भी बढ़ जाती है. दुकान संचालकों के अनुसार, मिठाइयों में जरूरत के मुताबिक चीनी का इस्तेमाल किया जाता है और कृत्रिम स्वाद या अनावश्यक मिलावट से बचने की कोशिश की जाती है. मिठाइयां भैंस के दूध से तैयार की जाती हैं. संचालक के मुताबिक, लंबे समय से एक ही दूध सप्लायर से दूध लेने की वजह से गुणवत्ता में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है.
दुकान पर मिठाइयां तैयार करने के तरीके में भी पारंपरिक अंदाज नजर आता है. संचालक के मुताबिक, गैस सिलेंडर से जुड़ी परेशानियों के बाद कई मिठाइयां लकड़ी की धीमी आंच पर तैयार की जाने लगीं. उनका मानना है कि धीमी आंच पर दूध को पकाने से मिठाई में अलग स्वाद और खुशबू आती है. वर्तमान में दुकान पर रोजाना करीब 25 से 30 केन दूध की खपत होती है.
समय के साथ दुकान ने अपने कारोबार को ऑनलाइन माध्यम से भी जोड़ा है. दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों से ग्राहक फोन और ऑनलाइन माध्यम से मिठाई का ऑर्डर करते हैं. ग्राहक अपना पता और संपर्क विवरण साझा करते हैं, जिसके बाद उपलब्धता के अनुसार मिठाइयां उनके घर तक पहुंचाई जाती हैं. इससे दुकान की पहुंच स्थानीय बाजार से आगे बढ़ी है और दूर रहने वाले ग्राहक भी यहां की मिठाइयों का स्वाद ले पा रहे हैं.
संचालक के मुताबिक, दुकान पर दूसरे शहरों के साथ विदेश से आने वाले ग्राहक भी पहुंचते हैं. कई लोग विदेश जाते समय यहां का कलाकंद और दूसरी मिठाइयां अपने साथ ले जाते हैं. नियमित ग्राहक कुलदीप नागर बताते हैं कि वह कई वर्षों से यहां मिठाई खरीदते आ रहे हैं. उनके अनुसार, दुकान की खासियत स्वाद और गुणवत्ता में लगातार बनी रहने वाली एकरूपता है. वहीं ग्राहक वैभव का कहना है कि यहां की मिठाइयां उन्हें काफी पसंद हैं और वह अक्सर दुकान से मिठाई खरीदते हैं. एक कड़ाही और कुछ लीटर दूध से शुरू हुआ नवी कलाकंद का कारोबार आज बड़े स्तर तक पहुंच चुका है. पारंपरिक स्वाद, गुणवत्ता और ग्राहकों के लंबे समय से बने भरोसे ने इस मिठाई की दुकान को ग्रेटर नोएडा के चर्चित स्थानीय कारोबारों में जगह दिलाई है.

