भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रह सकती है. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत, बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है. सुबह यह करीब 62 अंक गिरकर 24,028 पर कारोबार करते हुए नजर आ रहा है. पिछले निफ्टी फ्यूचर्स बंद भाव से लगभग 48 अंक नीचे है. ऐसे में शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिल सकता है.
पिछले कारोबारी दिन यानी 1 सितंबर को भी घरेलू बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था. निफ्टी 50 करीब 24.60 अंक यानी 0.10% गिरकर 24,055.80 पर रहा, जबकि सेंसेक्स 12.99 अंक यानी 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 76,944.28 पर बंद हुआ.
अमेरिका और एशियाई बाजारों से कमजोर संकेत
अमेरिकी शेयर बाजार में भी मंगलवार को दबाव देखने को मिला. तेल की कीमतों में तेजी, बॉन्ड यील्ड बढ़ने और जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया. साथ ही, ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिल रही है. कोस्पी करीब 3% और निक्केई 2.91% नीचे कारोबार कर रहे हैं. इसके अलावा ताइवान इंडेक्स 0.91%, शंघाई 0.75% और हैंग सेंग 0.65% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. कमजोर ग्लोबल संकेतों और महंगे कच्चे तेल के बीच आज भारतीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है. भारत के लिए महंगे कच्चे तेल की चिंता ज्यादा अहम है, क्योंकि लंबे समय तक तेल महंगा रहने से महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से क्यों बढ़ी चिंता?
दुनिया के बड़े बाजारों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. इसकी वजह महंगी एनर्जी और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के साथ सरकारी कर्ज को लेकर बढ़ी आशंकाएं हैं. जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो कुछ निवेशकों के लिए शेयरों की तुलना में बॉन्ड ज्यादा निवेश कर सकते हैं. इससे इक्विटी बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. अमेरिका-ईरान तनाव भी बाजार के लिए अहम रिस्क बना हुआ है. अगर तनाव और बढ़ता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है. इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है.
निफ्टी के लिए 24,000 का लेवल
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, टक्निकल नजरिए से अब निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है. मंगलवार को इंडेक्स ने दिन के दौरान 23,952.55 का लो लेवल भी देखा, लेकिन अंत में 24,000 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा. एनालिस्ट के मुताबिक अगर निफ्टी 24,000 के नीचे रहता है तो बाजार में और कमजोरी आ सकती है. इसके बाद 23,900-23,800 पर नजर रहेगी. वहीं, ऊपर की तरफ 24,150-24,250 भी मजबूत रेजिस्टेंस यानी बड़ा रजिस्टेंस बन सकता है.
मौजूदा माहौल में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में एक साथ पूरे बाजार में खरीदारी करने के बजाय चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना बेहतर स्ट्रैटजी हो सकती है. सेक्टर के परफॉर्मेंस, ग्लोबल संकेत और तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा.

