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Crude Production : तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और अन्य सहयोगी देशों ने अक्टूबर तक अपना उत्पादन नहीं बढ़ाने का फैसला किया है. रूस और सऊदी अरब की अगुवाई वाले इस संगठन का कहना है कि जब तक ईरान और अमेरिका का युद्ध खत्म नहीं होता और होर्मुज का विकल्प नहीं खुल जाता, तब तक उत्पादन इसी लेवल पर बनाए रखा जाएगा.
ओपेक देशों ने अक्टूबर तक तेल उत्पादन नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के युद्ध से उपजा संकट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. इसका असर आने वाले त्योहारी सीजन पर भी दिखने का अंदेशा लग रहा है. कच्चे तेल के उत्पादक देशों के संगठन ओपेक व अन्य सहयोगियों ने अक्टूबर तक उत्पादन नहीं बढ़ाने का फैसला किया है. सऊदी अरब और रूस की अगुवाई वाले 7 देशों के संगठन ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की बैठक में अक्टूबर तक अपने उत्पादन का कोटा मौजूदा लेवल पर बरकरार रखने का फैसला किया है. जाहिर है कि अक्टूबर से ही शुरू हो रहे त्योहारी सीजन पर भी इसका असर दिखेगा.
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल का निर्यात भरपूर नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि फारस की खाड़ी के जरिये भी तेल का निर्यात कम हो रहा है.तेल के निर्यात पर पड़ने वाले इस असर को देखते हुए ओपेक और सहयोगी देशों ने अपना उत्पादन अक्टूबर तक मौजूदा लेवल पर ही बनाए रखने का फैसला किया है. ओपेक और सहयोगी देशों का कहना है कि जब तक निर्यात के लिए कोई नया रास्ता नहीं मिल जाता है, तब तक उत्पादन नहीं बढ़ाया जाएगा.
मुश्किल है आगे का रास्ता
सप्लाई कम होने के बावजूद OPEC और उसके सहयोगी देशों ने युद्ध के दौरान कोटा बढ़ाना जारी रखा, ताकि साल 2023 में प्रोडक्शन पर लगाई गई पाबंदियों को पूरी तरह हटाया जा सके. इसके अलावा लड़ाई खत्म होने के बाद कुछ सदस्यों को प्रोडक्शन बढ़ाने की अतिरिक्त छूट मिल सके. हालांकि, इस गठबंधन को अभी भी सप्लाई का एक और हिस्सा बहाल करना है, लेकिन ऐसा करना मुश्किल होगा क्योंकि पाबंदियों की घोषणा के बाद से कई सदस्यों की प्रोडक्शन क्षमता कम हो गई है. ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है.
कीमतों में आ रहा उतार-चढ़ाव
रिस्टैड एनर्जी में जियोपॉलिटिकल एनालिसिस के हेड जॉर्ज लियोन ने कहा कि पिछले हफ्ते फिर से शुरू हुई लड़ाई की वजह से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ठिकानों पर नए हमले का आदेश दिया और इसके जवाब में इस्लामिक रिपब्लिक ने इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर दिए. फिलहाल OPEC और सहयोगी देशों ने असल बाजार के बजाय कागजों पर ही तेल की सप्लाई को मैनेज करना शुरू कर दिया है. पहले ओपेक के सचिवालय में काम करने वाले लियोन का कहना है कि असली असर तब दिखेगा जब होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा. तब यह ग्रुप अचानक सीमित एक्सपोर्ट को मैनेज करने की स्थिति से हटकर तेल की बढ़ती सरप्लस (अतिरिक्त सप्लाई) से निपटने की स्थिति में आ सकता है.
अब क्या है ओपेक की चुनौती
मौजूदा परिस्थितियों में ओपेक और उसके सहयोगी देशों की अगली प्राथमिकता यह पता लगाना है कि हर सदस्य असल में कितना प्रोडक्शन कर सकता है, ताकि साल 2027 के लिए सदस्यों की प्रोडक्शन लिमिट तय की जा सके. यह रिव्यू इस महीने के आखिर तक पूरा हो जाएगा और फिर नवंबर के आखिर में जब पूरा अलायंस मिलेगा तो तेल मंत्री इस पर विचार करेंगे. लियोन ने कहा कि अब ध्यान मंथली प्रोडक्शन एडजस्टमेंट से हटकर साल 2027 को लेकर होने वाली बहस पर जा रहा है. यह काम कहीं ज्यादा मुश्किल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने की संभावना है. ओपेक की अगली बैठक 4 अक्टूबर को होने वाली है, तब तक प्रोडक्शन लिमिट मौजूदा लेवल पर ही रहेगी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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