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दादी-नानी के पारंपरिक तरीके से घर पर स्वादिष्ट और पाचक फर्मेंटेड अचार तैयार करें. इसके लिए ताज़ी गाजर, मूली, शलजम और हरी मिर्च को साफ़ करके काट लें. अब एक सूखे कांच के जार में सब्जियां, राई, अदरक-लहसुन और नमक का उबला-ठंडा पानी डालें. सब्जियां पानी में पूरी तरह डूबी रहनी चाहिए. जार को सामान्य तापमान पर रखें. कुछ ही दिनों में खट्टा, सेहतमंद और बिना तेल वाला प्रोबायोटिक देसी अचार बनकर तैयार हो जाएगा.
गाजर, मूली और शलजम का अचार तो आपने खाया होगा. लेकिन क्या आपने इसे फर्मेंट करके बनाया है? इसमें सब्जियों को नमक वाले पानी में डालकर कुछ समय के लिए रखा जाता है. इस दौरान सब्जियों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया काम करते हैं और धीरे-धीरे अचार में खट्टापन आने लगता है. इसे ही फर्मेंटेशन यानी प्राकृतिक तरीके से खट्टा होने की प्रक्रिया कहते हैं. दादी-नानी के समय से चले आ रहे इस तरीके के पीछे स्वाद के साथ-साथ विज्ञान भी छिपा है.
फर्मेंट वाला अचार बनाने के लिए गाजर, मूली, शलजम, फूलगोभी और हरी मिर्च जैसी सब्जियां ली जा सकती हैं. इसके लिए सब्जियां ताज़ी और अच्छी तरह साफ़ की हुई होनी चाहिए. सब्जियों को काटकर नमक वाले पानी में डालकर रखा जाता है. स्वाद के लिए इसमें सरसों के दाने, लहसुन, अदरक जैसे मसाले भी डाल सकते हैं. ध्यान रखें कि सब्जियां पानी के अंदर ही रहें. जो हिस्सा पानी से बाहर रहेगा, उसके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है.
सब्जियों को नमक वाले पानी में रखने के बाद उनमें मौजूद कुछ अच्छे बैक्टीरिया काम करना शुरू करते हैं. ये सब्जियों में मौजूद प्राकृतिक मिठास को धीरे-धीरे ऐसे पदार्थ में बदलते हैं, जिससे अचार में खट्टापन आता है. यही फर्मेंटेशन की प्रक्रिया है. इसके लिए साफ़ कांच का जार इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. जार और चम्मच भी अच्छी तरह साफ़ और सूखे होने चाहिए. अचार को तैयार होने में कितना समय लगेगा, यह मौसम और तापमान पर भी निर्भर करता है.
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इस तरह के अचार में नमक सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं डाला जाता. नमक ऐसे खराब बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणुओं की बढ़त को रोकने में मदद करता है जो अचार को खराब कर सकते हैं. साथ ही इससे अचार में काम करने वाले अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद मिलती है. इसलिए अपनी मर्जी से नमक बहुत कम कर देना ठीक नहीं है. अगर नमक कम होगा तो अचार जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ सकता है. नमक की सही मात्रा किसी भरोसेमंद रेसिपी के हिसाब से रखें.
50 सालों से अचार बना रही मोना चावला बताती हैं कि सही तरीके से बनाया गया फर्मेंट वाला अचार कुछ अच्छे बैक्टीरिया दे सकता है जो हमारे पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर अचार सेहत के लिए फायदेमंद ही होगा या यह किसी बीमारी को ठीक कर देगा. अचार में नमक की मात्रा ज्यादा हो सकती है, इसलिए इसे थोड़ी मात्रा में खाना बेहतर है. जिन लोगों को डॉक्टर ने नमक कम खाने की सलाह दी है, उन्हें खास तौर पर सावधानी रखनी चाहिए.
दादी-नानी के ज़माने से नमक वाले पानी में सब्जियों का अचार बनाने का यह तरीका चला आ रहा है. घर पर अचार बनाते समय कोशिश करें कि उतना ही अचार बनाएं जिसे कम समय में खाकर खत्म किया जा सके. अगर काफी पुराना रखा अचार है और उसमें फफूंदी दिखाई दे रही है, तो उसे बिल्कुल न खाएं. ऐसे अचार को फेंक देना ही बेहतर है. बाकी साफ़-सफ़ाई और सही तरीके का ध्यान रखते हुए नमक वाले पानी में बना यह देसी अचार स्वाद के साथ पुराने ज़माने की याद भी दिलाता है.
अगर घर पर फर्मेंट वाला अचार बना रहे हैं तो सबसे पहले सफ़ाई का ध्यान रखें. ताज़ी सब्जियां लें और जार को अच्छी तरह साफ़ करके सुखा लें. सब्जियों को नमक वाले पानी में पूरी तरह डुबाकर रखें. जार को ऐसी जगह रखें जहां बहुत ज्यादा गर्मी न हो और सीधी धूप भी न पड़े. अचार का खट्टापन और स्वाद ठीक लगने लगे तो उसे ठंडी जगह या ज़रूरत के हिसाब से फ्रिज में रखा जा सकता है. सबसे ज़रूरी बात स्वाद के चक्कर में सफ़ाई और नमक की सही मात्रा से समझौता न करें.

