Thursday, October 8, 2026
Homeविदेशसुपर-डुपर अल नीनो से पूरी धरती लाल: 76 साल में सबसे...

सुपर-डुपर अल नीनो से पूरी धरती लाल: 76 साल में सबसे ज्यादा गर्म समुद्र; बाढ़-सूखा और बीमारियों का खतरा, 4.5 लाख मौतों की आशंका




दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो का सामना कर रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा हो गया है। यह 1950 के बाद का सबसे खतरनाक अल नीनो बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कह रहे हैं। इससे दुनिया के कई हिस्सों में ज्यादा गर्मी, सूखा या भारी बारिश हो सकती है। शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। दिसंबर में पीक पर रहेगा अल नीनो इस साल अल नीनो दिसंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके असर से आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने की आशंका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने बारिश का पैटर्न बदलने से कई इलाकों में सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। WMO के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसका असर उत्तरी गोलार्ध में 2027 के वसंत तक बना रह सकता है। संगठन ने फरवरी 2027 तक इसके जारी रहने की करीब 100% संभावना जताई है। ज्यादा गर्मी से हीट स्ट्रोक और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बारिश का पैटर्न बिगड़ने से कहीं पानी की कमी तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। अल नीनो से भारत में कम बारिश, सूखे का खतरा अल नीनो का असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13% कम बारिश के साथ खत्म हुआ। यह 2001 के बाद भारत का चौथा सबसे सूखा मानसून रहा। मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो का असर भी देखा गया। अल नीनो से तापमान बढ़ने का असर यूरोप में भी दिखा। फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में इस साल कई जगह रिकॉर्ड गर्मी पड़ी। कम बारिश से डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया। अल नीनो सिर्फ प्रशांत महासागर में क्यों आता है? अल नीनो का मतलब सिर्फ समुद्र का गर्म होना नहीं है। यह प्रशांत महासागर में होने वाली खास प्राकृतिक प्रक्रिया है। सामान्य स्थिति में प्रशांत महासागर की हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं और गर्म पानी को इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र की गहराई से ठंडा पानी ऊपर आता रहता है।
अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे पश्चिम में जमा गर्म पानी पूर्व की तरफ फैलने लगता है और प्रशांत महासागर का मध्य और पूर्वी हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। दूसरे महासागरों में भी तापमान बदलता है, लेकिन वहां हवाओं और समुद्र के पानी की ऐसी खास व्यवस्था नहीं होती, इसलिए उसे अल नीनो नहीं कहा जाता। गूगल पर ट्रेंड में बना हुआ है अल नीनो… सोर्स- गूगल ट्रेंड्स ————————- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ के मॉल में पानी घुसा, फर्रुखाबाद में ओले गिरे:यूपी के 42 जिलों में बारिश का अलर्ट; छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिजली गिरने से 3 मौतें उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ और झारखंड के आसपास बने ऊपरी हवा के साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण कई क्षेत्रों में बनी ट्रफ के कारण मौसम एक बार फिर बदल गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments