िमहानवमी पर आज मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुबह से भीड़ उमड़ रही है। कोलकाता के पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के बाद बिहार में भी प्रशासन अलर्ट है। पंडालों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के साथ लोहे की बैरिकेडिंग की गई है। मुंगेर की बड़ी दुर्गा मंदिर में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें। इस बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज दोपहर 3 बजे मुंगेर पहुंचेंगे। वे शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में जाकर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेंगे। सोमवार देर शाम भोजपुरी गायक मनोज तिवारी समेत व्यास भरत दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचेंगे। मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आज पूजा-अर्चना हो रही है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मां अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। श्रद्धालु आज महानवमी पर व्रत रखकर मां की आराधना कर रहे हैं। कुछ भक्त आज कन्या पूजन कर पारण कर लेते हैं। महाअष्टमी की तस्वीरें देखिए… कई लोग आज करेंगे नवमी पूजन, कुछ 20 अक्टूबर को मनाएंगे महानवमी ज्योतिषाचार्य राकेश झा के मुताबिक, उदयातिथि के अनुसार महानवमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी। पूजन के बाद श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों के पाठ का समापन करेंगे। मंत्र जाप और पाठ के बाद हवन, तर्पण, मार्जन और पुष्पांजलि की जाएगी। इसके बाद देवी स्वरूपा कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया जाएगा और प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। मां सिद्धिदात्री की पूजा से मिलती हैं सिद्धियां देवी पुराण के अनुसार, मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। मान्यता है कि उनकी आराधना से लौकिक और पारलौकिक मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां के स्मरण, ध्यान और पूजन से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है। नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने श्रीमद् देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कंध के 27वें अध्याय का उल्लेख करते हुए बताया कि दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन से ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि, विद्या और सिद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कन्याओं की अलग-अलग आयु के अनुसार उनके स्वरूप बताए गए हैं। दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी, पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी, छह वर्ष की कन्या को कालिका, सात वर्ष की कन्या को चंडिका, आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी, नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा और दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा माना गया है। मान्यता के अनुसार, एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य, दो कन्याओं के पूजन से भोग और मोक्ष, तीन कन्याओं के पूजन से धर्म-अर्थ-काम, चार कन्याओं के पूजन से राज्यपद और पांच कन्याओं के पूजन से विद्या की प्राप्ति होती है। इसी तरह छह कन्याओं के पूजन से सिद्धि, सात से राज्य, आठ से संपदा और नौ कन्याओं के पूजन से पृथ्वी पर प्रभुत्व प्राप्त होने की मान्यता है। रवियोग में मनेगी विजयादशमी, हाथी पर विदा होंगी मां ज्योतिषाचार्य राकेश झा के मुताबिक, शारदीय नवरात्र के समापन के बाद आश्विन शुक्ल दशमी को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और रवियोग का संयोग रहेगा। मां दुर्गा की विदाई के बाद श्रद्धालु जयंती धारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जयंती धारण करने से मानसिक शांति, आरोग्य, सुख-समृद्धि और पारिवारिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार मां दुर्गा की विदाई गज यानी हाथी पर होगी। नवरात्र का व्रत या फलाहार करने वाले श्रद्धालु बुधवार को देवी की विदाई के बाद पारण करेंगे। शनिवार को CM सम्राट चौधरी समेत नितिन नवीन ने की थी पूजा, देखें कुछ तस्वीरें….
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