उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। सुबह और शाम हल्की ठिठुरन महसूस होने लगी है, जबकि कई जिलों में कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। गुरुवार सुबह भी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ समेत 10 शहरों में कोहरा छाया हुआ है। कई जगह दृश्यता घटकर 50 मीटर तक पहुंच गई। ग्रामीण इलाकों में 10 मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो गया। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिवाली वाले हफ्ते में ठंड और बढ़ेगी। सुबह के समय कोहरा छाए रहने की संभावना है। दूसरी ओर, पश्चिमी यूपी के एनसीआर वाले जिलों में प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। नोएडा का एक्यूआई 405 दर्ज किया गया, जबकि गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत की हवा भी रेड जोन में पहुंच गई है। वाराणसी बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बंगाल की खाड़ी से उठे नए तूफान का यूपी पर सीधा असर नहीं पड़ रहा है। हालांकि, प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दिवाली वाले हफ्ते में तापमान में और गिरावट आने के आसार हैं। सुबह के समय कोहरा बना रह सकता है। मौसम में बदलाव के साथ सुबह और शाम की ठंडक बढ़ेगी। मौसम की तस्वीरें देखिए- 4 जिलों की हवा सांस लेने लायक नहीं, प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रेप-2 लागू झांसी सबसे गर्म, मुजफ्फरनगर में सबसे ठंडी रात 4 नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान झांसी में 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वाराणसी और बहराइच 32.2 डिग्री के साथ दूसरे स्थान पर रहे। प्रयागराज में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और गोरखपुर में 31.6 डिग्री रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान के आंकड़ों में वाराणसी 20 डिग्री के साथ सबसे नीचे रहा। लखीमपुर खीरी में 20.2, अयोध्या में 20.5, बलिया में 20.7 और फतेहपुर में 22 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मंगलवार रात मुजफ्फरनगर में पारा 15.3 डिग्री तक गिरने से वहां सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। CM बोले- फसल बर्बादी पर तत्काल मुआवजा दें यूपी में 29 से 31 अक्टूबर तक अर्नब तूफान की वजह हुई लगातार बारिश से फसलों को हुए नुकसान पर सीएम योगी एक्शन में हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर तत्काल फसल को हुए नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही फसल बर्बादी पर तत्काल मुआवजा देने के लिए कहा। साथ ही कहा कि हम किसानों के लिए विशेष पैकेज लेकर आएंगे। रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई में बरतें सावधानी नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों के प्रबंधन में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के दौरान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। निचले खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पर्याप्त नमी है, वहां अनावश्यक सिंचाई से बचें। मौसम की स्थिति और मिट्टी में नमी को देखते हुए ही बुवाई और सिंचाई का निर्णय लें। ठंड-कोहरे में इन फसलों का रखें ध्यान
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यूपी में सुबह कोहरा-शाम को ठिठुरन बढ़ी: दिवाली वाले हफ्ते में बढ़ेगी सर्दी, नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब, AQI 405 पहुंचा – Uttar Pradesh News
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