बिहार विधान परिषद के सभापति और भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अवधेश नारायण सिंह ने परिषण के सचिव को लेटर सौंपा है। बताया जा रहा है कि बीजेपी और जदयू के बीच सत्ता संतुलन को लेकर बनी सहमति के तहत सभापति ने इस्तीफा दिया है। अब यह पद JDU कोर्टे में जाने की संभावना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम सभापति के लिए सबसे आगे चल रहा है। NDA में पदों के बंटवारे से जुड़ा है मामला बिहार में नई सरकार के गठन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद NDA के दोनों प्रमुख सहयोगी दलों भाजपा और JDU के बीच महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के संतुलन को लेकर चर्चा चल रही थी। मौजूदा स्थिति में मुख्यमंत्री पद और विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के पास है। डॉ. प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद JDU को देने पर दोनों दलों के बीच सहमति बनी है। रामवचन राय का नाम सबसे आगे अवधेश नारायण सिंह के बाद सभापति पद के लिए JDU के वरिष्ठ नेता और वर्तमान उपसभापति रामवचन राय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। रामवचन राय को सदन के कामकाज और संसदीय प्रक्रियाओं का लंबा अनुभव है। वर्तमान में वे बिहार विधान परिषद के उपसभापति हैं। 2024 में उन्हें निर्विरोध उपसभापति चुना गया था। इससे पहले वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से भी जुड़े रहे हैं। उनकी शैक्षणिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए सभापति पद के संभावित दावेदार के तौर पर उनका नाम चर्चा में है। विधान परिषद में भाजपा और JDU की स्थिति बिहार विधान परिषद में कुल 75 सदस्य हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के 26 और JDU के 20 सदस्य हैं, जबकि RJD के 15 सदस्य हैं। इसके अलावा कांग्रेस, निर्दलीय और अन्य दलों के सदस्य भी परिषद में हैं। ऐसे में सभापति पद का बदलाव केवल एक संवैधानिक पद में परिवर्तन नहीं, बल्कि सदन के भीतर सत्ता पक्ष के दोनों प्रमुख घटकों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे से भी जुड़ा हुआ है।
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