Sunday, June 14, 2026
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कंधे पर बक्सा, हाथ में चनाचूर…50 साल के देवमुनि रोज कमाते हैं ₹500


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Jehanabad Chanachur Food Recipe: जहानाबाद के हुलासगंज के देवमुनि पारंपरिक अंदाज में गली मोहल्लों में चनाचूर बेचते हैं. वह रोज 10 किमी पैदल चलकर करीब 500 रुपए कमाते हैं. इस कमाई से उनका पूरा परिवार चलता है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.

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जहानाबाद: बचपन की ऐसी कई चीजें होती हैं, जिसे आप बड़े होने के बाद शायद भूल जाते हैं, लेकिन एक बार जब नजर पड़ती तो यादें ताजा हो जाती हैं. एक ही ऐसी चीज चनाचूर है, जिसे बिहार के जहानाबाद जिले के एक शख़्स लंबे समय से पुराने अंदाज में सबको खिला रहे हैं. वो चनाचूर को बक्से के अंदर कागज बंद लिफाफे में रख लेते हैं और सुबह ही घर से निकल जाते हैं. गली- गली और मोहल्ले या फिर भीड़ भाड़ वाली जगह जाकर खिलाते हैं. इस चनाचूर की बिक्री का कार्य हुलासगंज प्रखंड के रहने वाले देवमुनि करते हैं. उनके यहां कई लोग इस कार्य को कर चुके हैं.

देवमुनि की उम्र करीब 50 साल है. वो हर दिन एक पेटी में 100 फाइल चनाचूर लेकर बाहर निकलते हैं. सुबह में 8 बजे तक निकल जाते हैं और दोपहर तक बिक्री कर वापस घर लौटते हैं. वो एक लिफाफा चनाचूर की कीमत 10 रुपए रखे हुए हैं. हर दिन वो सबसे पहले चनाचूर को तैयार करते हैं और घर पर तैयार करने के लिए परिवार का सहयोग लेते हैं. चनाचूर तैयार हो जाता है तो उसे घर से लेकर बाहर बिक्री करने निकल जाते हैं. दिन भर इससे जो कमाई हो जाती है उससे उनका जीवन यापन होता है. उनको देखकर आपको अपने बचपन की यादें ताजा हो जाएंगी.

चनाचूर बेचने का है पुराना अंदाज

देवमुनि लोकल 18 से बताते हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न होने की वजह से पढ़ाई ज्यादा नहीं कर सके. उनके परिवार में चनाचूर बिक्री की खानदानी परंपरा रही है. उनके पिताजी भी यही कार्य किया करते रहे हैं. अब वह भी यही कर रहे हैं. शारीरिक मेहनत से ही यह कार्य पूरा हो पाता है. हर दिन चना से चनाचूर बनाते हैं और उसे फिर बक्से में पैक कर घर से बाहर बिक्री को निकल जाते हैं. रोजाना 100 फाइल बक्से में भरकर बाहर ले जाते हैं और 50 तक बिक जाती है. इससे अपना खर्च निकल जाता है. हालांकि, बहुत ज्यादा रोजाना पैदल चलना पड़ता है.

रोजाना चलते हैं 10 किमी पैदल

वह आगे कहते हैं कि हर दिन कम से कम 10 किमी पैदल चलते हैं. इससे हर दिन की कमाई 500 रुपए तक हो जाती है. घर परिवार चनाचूर से ही जो कमाई होती है, उससे चलता है. बच्चा भी कुछ नहीं कर सका तो हमें घर की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. अब तो शरीर भी थक चुका है. ऐसे में जब तक चल रहा है तब बिजनेस को संभाल रहे हैं.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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