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लोकसभा में कांग्रेस सांसद गोवाल पडवी ने आदिवासियों को अलग धर्म मानने की मांग की. उन्होंने 1931 की जनगणना का हवाला दिया. लेकिन यह बात सोशल मीडिया यूजर्स को खटक गई. बोले, कांग्रेस तो बांटने की राजनीति कर रही है. आखिर इनकी मंशा क्या है, क्या वह सांस्कृतिक विभाजन करना चाहती है.
लोकसभा में कांग्रेस के सांसद गोवाल कागदा पडवी ने आदिवासियों पर बात करते हुए ऐसी डिमांड कर डाली, जिस पर लोग भड़क उठे. कहने लगे, ये तो देश तोड़ने की बातें कर रहे हैं. हिंदुओं को बांटने की साजिश कर रहे हैं. कई लोगों ने तो डिटेल में एतिहासिक साक्ष्य भी पेश कर दिए. दरअसल, कांग्रेस सांसद गोवाल पडवी ने सदन में मांग उठाई कि आदिवासियों को ‘हिंदू’ न मानकर एक ‘अलग धर्म’ की मान्यता दी जाए. उन्होंने इसके लिए 1931 की ब्रिटिश जनगणना का हवाला दिया. लेकिन जैसे ही यह बयान सामने आया, लोगों ने कांग्रेस की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए. जनता पूछ रही है, क्या अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अब कांग्रेस का मेनिफेस्टो बन गई है?
गोवाल कागदा पडवी ने लोकसभा में कहा, 1931 में जब देश गुलाम था, तब अंग्रेजों ने आदिवासियों को अलग गिना था. उनकी दलील है कि आदिवासियों की संस्कृति किसी धर्म में समाहित नहीं होती, इसलिए उन्हें जनगणना में एक ‘अलग धर्म कोड’ दिया जाए, ताकि वे ‘सांस्कृतिक विलुप्ति’ से बच सकें. सुनने में यह ‘पहचान’ की बात लगती है, लेकिन सोशल मीडिया पर जागरूक यूजर्स ने इस तर्क की धज्जियां उड़ा दी हैं. लोगों का कहना है कि यह पहचान बचाने की नहीं, बल्कि हिंदू समाज को खंडित करने की ‘स्क्रिप्ट’ है.
1931 की जनगणना के दौरान जब देश ब्रिटिश शासन में था, तब आदिवासी वर्ग को अलग श्रेणी में गिना गया था। ये श्रेणी सभी प्रमुख धर्मों के साथ बराबरी से सूचीबद्ध थी।
ये कहा गया था कि आदिवासियों की विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान किसी अन्य धर्म के साथ समाहित नहीं होती है।… pic.twitter.com/MTEUN2UoII

