Wednesday, June 17, 2026
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खूब सारा नींबू डालकर बनता है अरिकंचन का खट्टा-तीखा गोजबा, कहते हैं- शाकाहारियों की मछली


मधुबनी. मिथिलांचल में जो नॉनवेज नहीं खाते, उनके लिए अरिकंचन मछली ही मानी जाती है. अरिकंचन का गोजबा दाल, नींबू, पत्ता और ढेर सारे मसालों से तैयार होने वाली एक डिश है जो खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है. आप भी जानिए इसकी रेसिपी. वैसे अरिकंचन के पत्ते से बहुत सारी चीजें बनती हैं और उनमें से एक है गोजबा, जिसे आप अपनी पसंद से चावल, रोटी या पराठे के साथ खा सकते हैं. इसमें थोड़ा समय लगता है, लेकिन यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है. इसमें नमकीन और खट्टे का फ्लेवर आता है.

शाकाहारी मछली कहें या अरिकंचन गोजबा
मिथिलांचल में जो नॉनवेज नहीं खाते हैं, उनके लिए अरिकंचन शाकाहारी मछली की तरह ही है, क्योंकि जितनी मेहनत मछली बनाने में होती है, वैसी ही विधि इस सब्जी को बनाने में भी है. जैसे मछली तली जाती है, वैसे ही इसको भी पकौड़े की तरह तलकर और वही मसाला तैयार करके फिर चावल के साथ स्वाद से खाया जाता है. वैसे तो अरिकंचन पत्ता की अलग-अलग तरह की सब्जी बनती है, लेकिन आज आपको गोजबा की रेसिपी बता रहे हैं, ताकि आप भी बनाकर खा सकें.

विधि और मसाले
अरिकंचन पत्ता (अरबी) को अच्छे से धोकर उसे साग की तरह काट लें. खूब सारा नींबू का रस मिला लें और उसके बाद आपके घर में जो भी दाल जैसे चना, मसूर, मूंग, खेसारी हो, सभी को पानी में भिगोकर पीस लें. उसमें नमक और जितने मसाले घर पर होते हैं, उनको मिलाकर उसके अच्छे से पकौड़े (बरी) बना लें. इधर ग्रेवी बनाने के लिए, जैसे मछली में डालते हैं, कढ़ाई में तेल गर्म होने पर तेज पत्ता, जीरा, पीली सरसों, लाल सूखी मिर्च को चटकाएं.

इसके बाद पीली सरसों का पेस्ट डालें. अगर आप प्याज देना चाहते हैं तो प्याज, टमाटर, लहसुन, अदरक का पेस्ट और रसोई के सभी मसाले जैसे हल्दी, नमक, मिर्च, धनिया, गरम मसाला डालें. मसाला पक जाने पर अपने हिसाब से जितने लोग खाएंगे, उतना पानी देकर ग्रेवी पकानी है.

नींबू ज्यादा पड़ता है
इंदु देवी कहती हैं कि ग्रेवी पकने पर तला हुआ अरबी पत्ता और दाल के पकौड़े (बरी) को रस में डालकर पका लें और फिर नींबू का रस मिला दें, ताकि अरिकंचन पत्ते का कड़वापन चला जाए. इसके बाद चावल के साथ गोजबा सब्जी का आनंद लें. इस सब्जी में नींबू का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि अरबी का पत्ता ज्यादा कड़वा होता है, जो गले की खराश से बचाता है.



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