मीटिंग में मौजूद सासंद व अधिकारी
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2047 पर चर्चा के लिए दिल्ली के सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में दक्षिण दिल्ली से भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मास्टर प्लान में कई नए विषय शामिल करने के सुझाव दिए।
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उन्होंने इसे दिल्ली के भविष्य का रोडमैप बताते हुए कहा कि इसके जरिए राजधानी में विकास और सुविधाओं का संतुलन बनाया जा सकेगा।
बिधूड़ी के अनुसार, भाजपा सांसदों-विधायकों के साथ विपक्षी विधायकों ने भी उनके सुझावों का समर्थन किया।
बैठक में भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल तथा डीडीए के सदस्य विधायक ओमप्रकाश शर्मा और करतार तंवर भी मौजूद रहे। डीडीए उपाध्यक्ष डॉ. एन. सरवन कुमार ने भी सुझावों पर सकारात्मक रुख अपनाया।
30-40 लाख नए घरों का लक्ष्य
बिधूड़ी ने कहा कि मास्टर प्लान-2047 का उद्देश्य दिल्ली को आधुनिक, हरा-भरा और भविष्य के लिए तैयार शहर बनाना है। इसमें किफायती आवास पर जोर देते हुए 30 से 40 लाख नए घरों का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि मेट्रो नेटवर्क को 416 किलोमीटर से बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने और 52 किलोमीटर साइकिल ट्रैक विकसित करने का लक्ष्य भी प्रस्तावित है।
नरेला और ओखला जैसे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को आईटी पार्क और स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने की योजना है।
मीटिंग में मौजूद सासंद व अधिकारी
गांवों और कॉलोनियों को नियमित करने की मांग
बिधूड़ी ने सुझाव दिया कि ओ-जोन के गांवों और कॉलोनियों तथा 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों को 1,511 नियमित कॉलोनियों की सूची में शामिल किया जाए।
उन्होंने एमसीडी द्वारा सर्वे के आधार पर कमर्शियल किए जाने की अनुशंसा वाली 351 सड़कों को कमर्शियल रोड घोषित करने की मांग की।
साथ ही दिल्ली की अन्य सड़कों का भी सर्वे कर 70 फीसदी से अधिक दुकानें होने वाली सड़कों को कमर्शियल रोड घोषित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने एक एकड़ वाली जीडीए पॉलिसी लागू करने और गांवों के लाल डोरे से बाहर की एक्सटेंडेड आबादी को भी नियमित करने की मांग की।
पुरानी कॉलोनियों और बाजारों को राहत देने का सुझाव
बिधूड़ी ने विभाजन के बाद दिल्ली आकर बसे लोगों की कॉलोनियों की लीज बढ़ाने और उन्हें फ्रीहोल्ड करने का सुझाव दिया।
इसके अलावा लाजपत राय मार्केट के दुकानदारों को मालिकाना हक, डीडीए की पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना अधिकार देने और उन्हें फ्रीहोल्ड करने की मांग की।
उन्होंने दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में सील पड़ी करीब 13 हजार दुकानों को डी-सील करने का भी सुझाव दिया।
बिधूड़ी ने कहा कि इन प्रस्तावों से दिल्ली में आवास, व्यापार और विकास से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो सकता है।

