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Property Knowledge : मान लीजिए कि आपकी कोई जमीन गली के ऐसे कोने में पड़ती है, जहां कोई आने-जाने का रास्ता ही नहीं है. सामने जो रास्ता है भी वह किसी अन्य की जमीन से जाता है. अब सवाल ये है कि क्या आपको दूसरे की जमीन से रास्ता लेने का अधिकार है या नहीं. अगर है तो आप कितना चौड़ा रास्ता बना सकते हैं और क्या आप उस जमीन के मालिक भी बन सकते हैं.
सुखाधिकार कानून के तहत दूसरे की जमीन से रास्ता मांगा जा सकता है.
नई दिल्ली. संपत्ति के विवाद में एक मुद्दा अक्सर सामने आता है कि आपके घर के सामने दूसरे की जमीन पड़ रही तो आने-जाने का रास्ता कहां से मिलेगा. मसलन, अगर आपका रास्ता हर तरफ से बंद है और जो खुला है, वह किसी और की जमीन है. क्या ऐसे में आपको दूसरे की जमीन पर रास्ता बनाने का अधिकार होगा. इस बारे में देश का कानून आखिर क्या कहता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर बाकायदा कानून और गाइडलाइन बनाई है.
भारतीय कानून में एक प्रावधान है ईजमेंट राइट यानी सुखाधिकार का. इंडियन ईजमेंट एक्ट, 1882 के तहत यह कानून किसी और की जमीन से भी आपको रास्ता दिलाने की वकालत करता है. हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. कानून के तहत किसी अन्य की जमीन पर सीमित उपयोग का अधिकार मिल सकता है, लेकिन मालिकाना हक उसी व्यक्ति के पास रहेगा जिसकी जमीन है. यह कानून अपनी मर्जी से किसी अन्य की जमीन पर रास्ता बनाने का अधिकार नहीं देता है.
कब मिलता है रास्ते का अधिकार
मान लीजिए कि आपने जहां पर मकान बनवाया है, वह काफी अंदर पड़ता है और आसपास रास्ते का कोई और विकल्प नहीं है. आपका मकान चारों तरफ से घिरा है और जिधर से खुला है, वह किसी और की जमीन है. ऐसे में ईजमेंट एक्ट (Indian Easements Act) की धारा 13 के तहत आप दूसरे की जमीन पर रास्ते का दावा कर सकते हैं. लेकिन, रास्ता तभी मिलेगा जब यह साबित हो जाए कि बिना इस रास्ते के संपत्ति का इस्तेमाल करना संभव नहीं है. अगर संबंधित मकान तक कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद है तो दूसरे की जमीन से रास्ता मांगने का अधिकार नहीं मिलेगा.
कब कर सकते हैं दावा
सुखाधिकार कानून की धारा 15 में साफ कहा गया है कि अगर किसी रास्ते का इस्तेमाल 20 साल से किया जा रहा है और अचानक उस जमीन को किसी और ने खरीदकर रास्ता बंद कर दिया तो संबंधित व्यक्ति को वहां से रास्ता मांगने का अधिकार है. इसमें यह साबित करना होता है कि रास्ते का इस्तेमाल खुलेआम किया जा रहा है और इसके लिए किसी अन्य की अनुमति भी नहीं लेनी पड़ी है. कानून की धारा 18 के तहत रास्ता मांगने वाले को यह साबित करना पड़ता है कि वहां से आवाजाही सार्वजनिक रूप से लंबे समय से रही है.
क्या रास्ता देने से कर सकते हैं इनकार
सवाल ये है कि जमीन का मालिक क्या रास्ता देने से इनकार कर सकता है. जवाब है कि अगर रास्ता मांगने वाला सेक्शन 13 की सभी शर्तों को पूरा कर रहा है तो जमीन का मालिक सामान्य रूप से रास्ता देने से इनकार नहीं कर सकता. इसमें यह भी तय किया जाता है कि रास्ते की चौड़ाई कितनी होगी. जमीन की स्थिति को देखते हुए रास्ते की चौड़ाई तय की जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि पहले से किस तरह के उद्देश्य के तहत रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

