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Faridabad Explosive Case: फरीदाबाद विस्फोटक बरामदगी मामले में हर पल नया मोड़ आ रहा है. अब इसमें एक महिला डॉक्टर जांच में दायरे में आ गई है. उसकी कार से AK-47 राइफल समेत अन्य हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं.
रिपोर्ट: अंशुल सिंह
Faridabad Explosive Case: फरीदाबाद में 350 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद होने के मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है. अब इसमें महिला का एंगल भी सामने आया है. जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) की पड़ताल में अब एक महिला डॉक्टर मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आई है. पुलिस ने उसकी कार से AK-47 राइफल समेत अन्य हथियार बरामद किए हैं. यह मामला डॉक्टरों के एक कथित रैडिकल मॉड्यूल से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हैं.
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा नंबर (HR55 CH STE) की एक कार से पुलिस ने एक AK-47 राइफल, तीन मैगजीन, एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और दो खाली कारतूस बरामद किए हैं. यह वाहन महिला डॉक्टर से जुड़ा हुआ पाया गया है. फिलहाल वह डॉक्टर जम्मू-कश्मीर में मौजूद है और उससे पुलिस पूछताछ कर रही है. इससे पहले जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें गिरफ्तार डॉक्टर मुजम्मिल से जुड़े लोकेशन भी शामिल थे. इन स्थानों से अमोनियम नाइट्रेट और अन्य ज्वलनशील पाउडर सहित बड़ी मात्रा में IED बनाने की सामग्री सूटकेसों में भरी हुई मिली थी. पुलिस का दावा है कि विस्फोटक की खेप करीब 15 दिन पहले डॉ. मुजम्मिल तक पहुंची थी.
डॉक्टरों का गैंग
इस पूरे मामले की शुरुआत सहारनपुर के डॉ. आदिल की गिरफ्तारी से हुई थी. उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि 2021–22 से डॉक्टरों का यह नेटवर्क कथित रूप से रैडिकलाइजेशन और आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था. पुलिस हैंडलर्स के रूप में हाशिम और बाद में श्रीनगर स्थित डॉ. ओमर के नाम सामने आए हैं. पुलिस यह पता लगा रही है कि महिला डॉक्टर ने हथियार और विस्फोटक सामग्री की लॉजिस्टिक सपोर्ट दी या नहीं. इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वाहन उसके नाम या नियंत्रण में था या नहीं. उसके कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन इस नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं इसका भी पता लगाया जा रहा है.
अन्य संदिग्ध भी रडार पर
फरीदाबाद के धौज गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार छापेमारी जारी है. पुलिस एक स्थानीय इमाम से भी पूछताछ कर रही है कि कहीं उसका किसी तरह का संपर्क इस मॉड्यूल से तो नहीं था. जांच एजेंसियों का मानना है कि दिल्ली के नजदीक होने और इलाके की अपेक्षाकृत सुनसान प्रकृति के कारण इन्हें सेफ-हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी काउंटर-टेरर सफलता बताया है. अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि कट्टरपंथ की प्रक्रिया कैसे समाज के उन पेशेवर वर्गों तक पहुंच सकती है, जो आम तौर पर जीवन बचाने से जुड़े होते हैं. जांच एजेंसियां नेटवर्क के और सदस्यों की तलाश में हैं, और संभावना है कि अगले कुछ दिनों में और गिरफ्तारियां होंगी.

