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ED Raids Case Near Bangladesh Boarder: ईडी ने मिजोरम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में छापे मारकर मादक पदार्थों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पकड़ा है. यह मामला 142 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध लेनदेन का है. इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुई है.
बांग्लादेश बॉर्डर के पास छापेमारी करने पहुंची ईडी की टीम.
ED Raids Case Near Bangladesh Boarder: भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से कमाए गए धन को म्यांमार तक पहुंचाने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने रविवार सुबह मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. जांच एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन को शेल कंपनियों और बैंक खातों के जरिए विदेश भेजने के आरोपों से जुड़ी है. ईडी की आइजोल सब-जोनल इकाई द्वारा की गई यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई. मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा दर्ज एक एनडीपीएस केस से जुड़ा है, जिसकी जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के संकेत मिले थे.
मिजोरम से शुरू हुई थी जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार 21 अगस्त 2025 को मिजोरम में एक वाहन काफिले की तलाशी के दौरान 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट्स और 40 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी. इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बाद की जांच में सामने आया कि यह कोई सामान्य तस्करी का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा था. एजेंसियों का दावा है कि म्यांमार स्थित सप्लायरों से मेथामफेटामाइन की खेप मिजोरम के चाम्फाई-जोखावथार सेक्टर के जरिए भारत में लाई जाती थी. इसके बाद ड्रग्स की यह खेप विभिन्न नेटवर्क के माध्यम से त्रिपुरा और अन्य राज्यों तक पहुंचाई जाती थी.
सीमा से बेहद नजदीक थे ठिकाने
सूत्रों के मुताबिक ईडी की जांच में जिन स्थानों पर छापेमारी की गई. उनमें से त्रिपुरा के कुछ ठिकाने बांग्लादेश सीमा से मात्र करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जबकि मिजोरम का एक स्थान म्यांमार सीमा से लगभग 500 मीटर दूर बताया गया है. सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल कथित तौर पर तस्करी और धन के प्रवाह को छिपाने के लिए किया जा रहा था.
142 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन
ईडी की जांच में अब तक 142 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है. एजेंसी को संदेह है कि नशे के कारोबार से अर्जित धन को पहले विभिन्न बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, फिर उसे म्यांमार में मौजूद लोगों और संस्थाओं के खातों तक पहुंचाया जाता था. जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क में कई कंड्यूट और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके. इस मामले के कुछ तार दिल्ली से भी जुड़े पाए गए हैं.
दिल्ली से हुई थी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
ईडी की जांच के केंद्र में मौजूद नेटवर्क का मुख्य सप्लायर म्यांमार निवासी चिनटुआंग उर्फ त्लुआंगा बताया जा रहा है. उसे हाल ही में एनसीबी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसियों का मानना है कि वही म्यांमार से भारत में मेथामफेटामाइन की आपूर्ति का प्रमुख संचालक था और उसके जरिए पूरे नेटवर्क का संचालन किया जाता था. ईडी ने जिन लोगों और संस्थानों से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली, उनमें त्रिपुरा के अनोवार हुसैन उर्फ सुमन मिया और जासिम मिया शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर ड्रग्स की खेप प्राप्त करने वाला बताया गया है.
इसके अलावा मिजोरम की ह्मिंगथानसांगी, जिनके बैंक खाते जांच के दायरे में हैं, तथा पश्चिम बंगाल स्थित मेसर्स रिजू एंटरप्राइजेज पर भी कार्रवाई की गई है. एजेंसी का आरोप है कि संबंधित बैंक खातों और व्यावसायिक इकाइयों का उपयोग धन शोधन के लिए किया गया. फिलहाल ईडी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

