Friday, May 29, 2026
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राजौरी में ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ का 7वां दिन, मौत के जाल में फंसे आतंकी


Rajouri Terrorist Encounter Live: जम्मू-कश्मीर के राजौरी के घने जंगल इन दिनों युद्धभूमि में बदल चुके हैं. ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ ऐसा शिकंजा कसा है, जिससे बच निकलना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है. पहाड़, जंगल, गुफाएं और दुर्गम घाटियां… हर जगह सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीमें डटी हुई हैं. इस ऑपरेशन को अब तक राजौरी का सबसे लंबा और सबसे हाई-इंटेंसिटी एंटी-टेरर मिशन माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक आतंकियों का मूवमेंट लगातार ट्रैक किया जा रहा है और पैरा कमांडोज को जंगल के भीतर सबसे खतरनाक जोन में उतारा गया है. सुरक्षाबलों का फोकस सिर्फ मुठभेड़ नहीं बल्कि आतंकियों को पूरी तरह घेरकर खत्म करने पर है. यही वजह है कि पूरे इलाके में मल्टी-लेयर कॉर्डन बनाया गया है. स्थानीय लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है. सेना का मानना है कि आतंकी अब सीमित इलाके में फंस चुके हैं और उनके लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है.

आतंकियों को बाहर निकालने के लिए सेना ने दागे रॉकेट लॉन्चर

सूत्रों के अनुसार सामान्य गोलीबारी का असर कम होने के कारण सेना ने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाने और उन्हें बाहर निकालने के लिए रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किया है. बताया जा रहा है कि राजौरी में आतंकियों के खिलाफ चल रहा यह अब तक का सबसे लंबा ऑपरेशन बनता जा रहा है. पूरे इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और ड्रोन समेत तकनीकी निगरानी के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

शनिवार को खुफिया इनपुट मिलने के बाद शुरू हुए इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई. डोरिमल-गंभीर मोगला बेल्ट में आतंकियों से शुरुआती संपर्क के बाद इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया. सेना की व्हाइट नाइट कोर ने पुष्टि की थी कि संयुक्त ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से संपर्क स्थापित हुआ था. शुरुआती जानकारी में दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई गई थी. अब सातवें दिन तक आते-आते ऑपरेशन और ज्यादा तेज कर दिया गया है. जंगल के अंदर पैरा स्पेशल फोर्सेज लगातार सर्च कर रही हैं जबकि आउटर कॉर्डन में CRPF और पुलिस की मजबूत तैनाती है. ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि आतंकी लंबे समय तक छिपने की तैयारी के साथ आए थे, लेकिन अब राशन और सुरक्षित रास्ते दोनों तेजी से खत्म हो रहे हैं.

जंगल के भीतर पैरा कमांडोज का बड़ा एक्शन

  • राजौरी के दुर्गम जंगलों में पैरा कमांडोज ने सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक कई संदिग्ध ठिकानों को चिन्हित किया गया है. सेना छोटे-छोटे सर्च ग्रुप बनाकर आगे बढ़ रही है ताकि आतंकियों को भागने का मौका न मिले. इलाके में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं.
  • सुरक्षाबलों का कहना है कि ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि घना जंगल और पहाड़ी इलाका आतंकियों को छिपने का मौका देता है. इसके बावजूद सेना ने मल्टी-लेयर घेराबंदी की है. जंगल के अंदर सेना और पैरा यूनिट्स मौजूद हैं जबकि बाहरी इलाकों में पुलिस और CRPF की चौकसी बढ़ाई गई है. स्थानीय गांवों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

‘ऑपरेशन शेरूवाली’ क्यों बना सबसे बड़ा मिशन?

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह ऑपरेशन सिर्फ आतंकियों की तलाश नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ समय में राजौरी-पुंछ बेल्ट में आतंकी गतिविधियां बढ़ी थीं. इसी वजह से इस बार सुरक्षाबल कोई जोखिम नहीं लेना चाहते. सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के संभावित सपोर्ट सिस्टम पर भी नजर रखी जा रही है.

हाई अलर्ट पर पूरा राजौरी इलाका

ऑपरेशन के चलते राजौरी के कई इलाकों में हाई अलर्ट जारी है. संवेदनशील जगहों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. सेना ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें. प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है.

’ऑपरेशन शेरूवाली’ कब शुरू हुआ था?

यह ऑपरेशन शनिवार को खुफिया इनपुट मिलने के बाद शुरू किया गया था. सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि राजौरी के डोरिमल-गंभीर मोगला इलाके में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं. इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने संयुक्त अभियान शुरू किया.

इस ऑपरेशन में कौन-कौन सी फोर्स शामिल हैं?

ऑपरेशन में भारतीय सेना की पैरा यूनिट्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF संयुक्त रूप से काम कर रही हैं. जंगल के अंदर सेना और पैरा कमांडोज सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं जबकि बाहरी घेराबंदी पुलिस और CRPF संभाल रही है.

आतंकियों के बच निकलने की कितनी संभावना है?

सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में मल्टी-लेयर कॉर्डन बना रखा है. ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी लगातार जारी है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकी अब सीमित इलाके में फंस चुके हैं और उनके लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है.



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