Tuesday, October 27, 2026
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राज्यपाल बोले-‘मां’ जैसी फिल्में समाज को देती हैं सही दिशा: राजमंदिर में राजस्थानी फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग, एक्टर राज जांगिड़ भी रहे मौजूद – Jaipur News




राजस्थानी सिनेमा में पारिवारिक रिश्तों, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्में समाज को नई दिशा दे सकती हैं। ऐसी फिल्मों से हर वर्ग को प्रेरणा लेनी चाहिए। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने यह बात राजस्थानी फिल्म ‘मां’ के राजमंदिर सिनेमा में हुए विशेष शो के दौरान कही। राजस्थान रॉयलवुड ग्रुप की ओर से आयोजित इस शो में राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर फिल्म का शुभारंभ किया और फिल्म देखने के बाद इसकी विषयवस्तु और संदेश की सराहना की। समाज को सही दिशा देने में भी भूमिका निभाती है फिल्में राज्यपाल ने कहा कि राजस्थानी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों की पहचान है। प्रदेश में ऐसी पारिवारिक फिल्में बननी चाहिए, जो रिश्तों में अलगाव और बिखराव के बजाय आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को सही दिशा देने और लोगों के विचारों को प्रभावित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्यपाल ने राजस्थानी फिल्मों के अभिनेता और ‘मां’ के मुख्य नायक राज जांगिड़ की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थानी सिनेमा के उत्थान के लिए जांगिड़ की ओर से लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। ‘मां’ जैसी फिल्मों से राजस्थानी सिनेमा को मिलेगी नई पहचान विशेष शो में शामिल सिविल लाइंस विधायक डॉ. गोपाल शर्मा ने कहा कि ‘मां’ जैसी फिल्में राजस्थानी सिनेमा को नई पहचान देने के साथ प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और भावनात्मक विरासत को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, मातृभाषा और यहां की मिट्टी से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने का प्रयास सराहनीय है। फिल्म देखने के बाद विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज ने भी इसकी विषयवस्तु की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में समाज में जागरूकता पैदा करती हैं। फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और लेखकों को राजस्थान की अपनी कहानियों पर फिल्में बनानी चाहिए, ताकि प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विरासत देशभर के दर्शकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि फिल्म का संदेश है कि युवा पीढ़ी के मन में माता-पिता के प्रति प्रेम और सद्भाव कम नहीं होना चाहिए। माता-पिता की सेवा करना भी ईश्वर की सेवा के समान है।
‘यह फिल्म नहीं, शिक्षा का मंदिर है’ फिल्म के विशेष शो में मौजूद पद्म ग्रुप के निदेशक और गौसेवी भामाशाह धर्मचंद कुलरिया फिल्म देखकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि ‘मां’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि शिक्षा का मंदिर है। उनके अनुसार, जहां कुछ फिल्में समाज में गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे सकती हैं, वहीं कुछ फिल्में लोगों में जागरूकता पैदा करने और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का काम करती हैं। ‘मां’ इसी तरह का संदेश देने वाली फिल्म है। कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े, विधायक डॉ. गोपाल शर्मा, धर्मचंद कुलरिया, रॉयलवुड ग्रुप के एन.के. मित्तल, सिनेमा हॉल के मैनेजर अशोक तंवर, फिल्म निर्देशक लखविंदर सिंह और फिल्म के मुख्य नायक राज जांगिड़ ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस मौके पर कई लोग रहे मौजूद इस अवसर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. समित शर्मा, राज्यपाल के ओएसडी राजकुमार सागर, भाजपा जिला अध्यक्ष अमित गोयल, राजस्थान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े श्रवण सागर कल्याण, राजेश जांगिड़, पी.एम. डूडी, रॉकी एस. संतोष, फिल्म निर्देशक धर्मेंद्र उपाध्याय, रेखा परिहार, निर्माता आदित्येंद्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एम.डी. सोनी, मुकेश झाझवड़, डॉ. शांति सैनी, ललिता शर्मा, डॉ. इंदु सैनी, आर.डी. भाटी, भाग्यश्री सैनी, हरिशंकर जांगिड़, नंदलाल खंडेला, हरलाल, नवरंग जांगिड़, अंकुर खंडेलवाल, उग्रसेन तंवर और प्रेम राठौड़ सहित कई लाेग उपस्थित रहे।



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