शिवहर: बिहार के शिवहर जिले से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है. यहां मीनापुर बलहा गांव की रहने वाली रूबी कुमारी ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो हर बड़ी से बड़ी मुश्किल को पार किया जा सकता है. पति की अचानक मौत के बाद जब जीवन में अंधेरा छा गया था, तब रूबी ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए नर्सरी व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, जिस काम के लिए उनकी अपनी सास ने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था. आज वही फैसला इस पूरे परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है और वे हर साल लाखों रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं.
दो वक्त की रोटी के लिए भी करना पड़ा था संघर्ष
रूबी कुमारी की जिंदगी साल 2013 में तब पूरी तरह बिखर गई. जब उनके पति कृष्णनंदन कुमार की एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई. वर्ष 2010 में शादी के बंधन में बंधी रूबी के सिर से पति का साया उठ चुका था और उनके कंधों पर छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी. उस समय स्थिति इतनी बदतर थी कि घर में दो वक्त की रोटी और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं बचते थे. कुछ समय तक उन्होंने जैसे-तैसे हरी सब्जी की खेती करके परिवार का पेट पालने की कोशिश की, लेकिन बढ़ती जरूरतों के आगे यह नाकाफी साबित हो रहा था. गरीबी के इस दौर में उन्हें लगने लगा था कि अगर उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो उनके बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा.
जीविका समूह के सहारे उठाया बड़ा कदम
मुश्किल समय में रूबी की मुलाकात क्षेत्र की कुछ अन्य महिलाओं से हुई, जिन्होंने उन्हें ‘जीविका समूह’ के बारे में जानकारी दी. साल 2016 में जीविका से जुड़ने के बाद रूबी को नई दिशा मिली. साल 2023 में उन्होंने नर्सरी व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन लिया और पौधशाला की नींव रखी. हालांकि, जब उन्होंने यह विचार अपनी सास के सामने रखा, तो उनकी सास ने इस काम को करने से सख्त मना कर दिया. उन्हें डर था कि यह नया व्यवसाय असफल हो गया तो कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा, लेकिन रूबी ने हार नहीं मानी और अपनी सास को प्रेम से समझा-बुझाकर इस काम को शुरू करने की अनुमति ले ली.
अब सालाना है 4-5 लाख की कमाई
आज रूबी कुमारी ने अपनी खुद की 12 कट्ठे जमीन पर शानदार नर्सरी विकसित कर ली है, जिसमें आम, लीची, अमरूद, पपीता, नींबू, आंवला, कटहल, सागवान, महोगनी और अर्जुन जैसे 13 अलग-अलग किस्मों के पौधे उपलब्ध हैं. उनके द्वारा तैयार किए गए ये पौधे जीविका समूह के माध्यम से अनुदानित मूल्य पर बेचे जाते हैं, साथ ही वन विभाग भी यहीं से पौधे खरीदता है. पिछले दो सालों से वे इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला रही हैं और सभी खर्चों को निकालकर सालाना 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं. इसके अलावा वह पशुपालन और हरी सब्जियों की खेती भी करती हैं, जिससे उनकी आय और अधिक मजबूत हो गई है.
बहू की सफलता से गर्व महसूस कर रहा परिवार
शुरुआत में जिस काम को लेकर सास ने मना किया था और आशंकाएं जताई थीं, आज उसी नर्सरी ने पूरे परिवार की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी है. बहू रूबी की असीम मेहनत, लगन और संघर्ष रंग लाया है, जिसे देखकर आज उनकी सास का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. जब परिवार के हालात सुधरे और समृद्धि आई, तो सास की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए. रूबी कुमारी ने न सिर्फ अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला है, बल्कि वे आज अपने समाज और आसपास की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन और अनुकरणीय मिसाल बन चुकी हैं.

