“मैं बार-बार कह रहा हूं, सिपाही अभिषेक की एके-47 फायरिंग में किसी भी छात्र को कोई नुकसान नहीं हुआ है। घटना के दिन (25 जुलाई) अभिषेक डीआईयू टीम में शामिल थे, और टीम एक केस की जांच करने जा रही थी। छात्रों के प्रदर्शन के बीच पूरी टीम जेपी चौक पर फंस गई। इसी दौरान अभिषेक ने टीम की सुरक्षा में फायरिंग की, जिसके लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मीडिया में जिन छात्रों के घायल होने का दावा किया जा रहा है, वह एके-47 की फायरिंग में घायल नहीं हुए हैं।” सीवान के जेपी चौक पर छात्रों पर एके-47 से हुई फायरिंग मामले में एसपी पूरण कुमार झा ने मीडिया से बातचीत कर यह जानकारी दी है। सोमवार को आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें आज सुनवाई होगी। घटना के पूरे दिन क्या-क्या हुआ, पुलिस को फायरिंग करने की नौबत क्यों आई, फायरिंग में कितने लोग घायल हुए, एक-47 से फायरिंग के ऑर्डर किसने दिए? डीएम ने क्या कहा? और मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, पूरी रिपोर्ट पढ़िए… फायरिंग से जुड़ी तस्वीरें… पूरे सिवान शहर में 20 से अधिक हॉट्सपॉट बनाए गए
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने पुलिस सूत्रों और अन्य अधिकारियों से जुटाई जानकारी के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह-सुबह एसपी और डीएम के बीच हाईलेवल मीटिंग हुई। इस मीटिंग में 40 से अधिक अधिकारियों को जोड़ा गया। मीटिंग में तय हुआ कि पूरे शहर के 20 से अधिक हॉटस्पॉट पर होम गार्ड और बिहार पुलिस की यूनिट तैनात की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान जिन इलाकों में दबाव ज्यादा होगा, वहां अतिरिक्त फोर्स भेजी जाएगी और जरूरत पड़ने पर नजदीकी हॉटस्पॉट से भी पुलिस बल को ट्रांसफर किया जाएगा। इसकी मॉनिटरिंग सीधे एसपी ऑफिस से होगी। प्रशासन को आशंका थी कि शुक्रवार की तुलना में शनिवार को कहीं ज्यादा संख्या में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और भीड़ उग्र भी हो सकती है। इसलिए स्थिति बिगड़ने पर हवाई फायरिंग की अनुमति भी इसी बैठक में दी गई थी। गांधी मैदान में भारी संख्या में छात्र जमा होने लगे
सुबह 9 बजे: पुलिस-प्रशासन की मोबाइल टीमें शहर में गश्त करने लगीं। इधर, गांधी मैदान में छात्रों का जमावड़ा बढ़ने लगा। वहीं, शहर में घूम-घूमकर आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन भी चल रहा था। पुलिस टीम लगातार आइसा और आरवाईए के संपर्क में थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आश्वासन भी मिला था, इसलिए किसी बड़ी घटना की आशंका नहीं थी। हालांकि, गांधी मैदान में लगातार बढ़ रही भीड़ को लेकर स्थानीय पुलिस चिंतित थी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार इनपुट भेज रही थी। करीब 11 बजे: गांधी मैदान में ढाई हजार से अधिक छात्र पहुंच चुके थे, जबकि उन्हें नियंत्रित करने के लिए मौके पर महज 30-40 पुलिसकर्मी मौजूद थे। लगातार मिल रहे इनपुट के बाद एसपी खुद गांधी मैदान पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और भीड़ को नियंत्रित करने की रणनीति बनाई। करीब 12 बजे: गांधी मैदान में बढ़ती भीड़ और बिगड़ते हालात को देखते हुए पुलिस ने मैदान खाली कराने का फैसला लिया। एसपी और डीएम के पहुंचने के करीब 15 मिनट बाद कार्रवाई शुरू हुई और बड़ी संख्या में छात्रों को खदेड़कर वहां से हटाया गया। गांधी मैदान से 10 से अधिक गलियां शहर के अलग-अलग चौक-चौराहों तक जाती हैं। मैदान से हटाए जाने के बाद छात्र इन्हीं अलग-अलग रास्तों से शहर के विभिन्न चौराहों पर पहुंच गए और कई जगह हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गया। कई जगहों पर पुलिस पोजिशन से भटक गए
इधर, काफी देर तक कोई बड़ी घटना नहीं होने के कारण शहर के अलग-अलग हॉटस्पॉट पर तैनात कई पुलिसकर्मी भी कुछ हद तक सुस्त पड़ गए और कई जगह अपनी-अपनी पोजिशन छोड़कर इधर-उधर हो गए। अचानक दोपहर करीब 2 बजे गांधी मैदान से निकले छात्र शहर के अलग-अलग चौराहों और बाजारों में पहुंचने लगे। इस स्थिति का अंदाजा किसी भी अधिकारी को नहीं था। करीब 2 बजे: स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जेपी चौक पर भी बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई। वहां पथराव और हिंसा शुरू हो गई। गांधी मैदान में मौजूद एसपी को फोन पर जेपी चौक की जानकारी मिली, जिसके बाद वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। उनके साथ कई गनर भी थे। छात्रों पर एके-47 से फायरिंग की गई
एसपी के वहां पहुंचने तक भीड़ काफी उग्र हो चुकी थी और पथराव जारी था। जेपी चौक के आसपास कई गलियां थीं, जो चौक को चारों ओर से जोड़ती थीं। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि छात्र किस गली से निकलकर किस दिशा से हमला कर सकते हैं। पथराव और हिंसा को काबू करने के दौरान एसपी ने गनरों से कहा, “देख क्या रहे हो, हैंडल करो… मामला हाथ से निकल गया है।” इसके बाद कई पुलिसकर्मी छात्रों की ओर बढ़े। इनमें सबसे आगे सिपाही अभिषेक थे, जिन्होंने अपनी AK-47 से फायरिंग शुरू कर दी। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह छात्रों की दिशा में फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं। घायल छात्र अस्पताल की ओर भागते दिखे
एक ओर फायरिंग कर छात्रों को पीछे धकेला गया, वहीं दूसरी ओर एसपी को कवर देते हुए पुलिस बल उन्हें जेपी चौक से बाहर निकालने में जुट गया। कुछ ही देर बाद पूरे सीवान में कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कुछ छात्र गोली लगने से घायल दिखाई दिए। वीडियो में घायल छात्र गलियों के रास्ते अस्पताल की ओर भागते नजर आए। इनमें दो छात्रों की गर्दन को छूते हुए गोली निकल गई, जबकि एक छात्र के पैर में गोली लगी। घायल छात्र हाफीज चौक का नाम लेते हुए कह रहे थे कि उन्हें वहीं गोली मारी गई। हाफीज चौक, जेपी चौक से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। एसपी पूरण कुमार झा का कहना है कि जेपी चौक पर हुई AK-47 की फायरिंग में किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। जिन छात्रों को गोली लगी है, वे जेपी चौक से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर घायल हुए हैं। वहां गोली कैसे चली, किसने चलाई और किन परिस्थितियों में चली, इसकी जांच की जा रही है। पूरे मामले पर डीएम विवेक ने कहा कि AK-47 से की गई फायरिंग नहीं होनी चाहिए थी और इसके लिए कोई आदेश भी नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम जांच के लिए जा रही थी, तभी छात्र प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया, जिसके कारण ऐसी स्थिति बनी। पुलिस की बड़ी चूक क्या रही
सीवान के एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी का कहना है, “पुलिस ने सीवान में हिंसा और प्रदर्शन को काबू करने के लिए जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की और कई हॉटस्पॉट भी बनाए, लेकिन प्रदर्शन की ऑन-द-स्पॉट मॉनिटरिंग के लिए कहीं भी मजिस्ट्रेट की तैनाती नहीं की गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टीयर गैस, वाटर कैनन जैसी बुनियादी तैयारियां भी नहीं थीं। मुझे ऐसा लगता है कि पुलिस छात्रों से निपटने नहीं, बल्कि आर-पार की स्थिति के लिए तैयार होकर आई थी।” जनहित याचिका में क्या है…
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इसमें 25 जुलाई को बिहार के सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा AK-47 से फायरिंग और अत्यधिक बल प्रयोग के मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। निष्पक्ष जांच की मांग: याचिका में कहा गया है कि NEET परीक्षा पेपर लीक और धांधली के विरोध में 25 जुलाई को आयोजित ‘बिहार बंद’ के दौरान छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती और अत्यधिक बल प्रयोग की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR: मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि प्रदर्शनकारियों पर आधुनिक हथियार (AK-47) का इस्तेमाल करने वाले तथा लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया जाए। जल्द सुनवाई (मेंशनिंग): मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मेंशन भी किया गया है, ताकि इस पर जल्द से जल्द सुनवाई हो सके।
Source link

