PMMVY: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) पिछले नौ सालों में देश की करोड़ों महिलाओं के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है. गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के समय आर्थिक मदद देकर यह योजना न सिर्फ महिलाओं को सहारा देती है, बल्कि सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा देती है. इस योजना की शुरुआत 1 जनवरी 2017 को पूरे देश में की गई थी. इसके तहत पहले बच्चे के जन्म पर 5,000 रुपये और दूसरे बच्चे के जन्म पर, अगर वह बेटी हो, तो 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है.
यह पूरी रकम सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजी जाती है, ताकि बीच में किसी तरह की गड़बड़ी न हो. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना शुरू होने से लेकर 8 जनवरी 2026 तक देशभर में 4.26 करोड़ महिलाओं को कुल 20,060 करोड़ रुपये की मातृत्व सहायता दी जा चुकी है. वहीं, सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में ही 8 जनवरी तक 59.19 लाख लाभार्थियों को 2,022.08 करोड़ रुपये की राशि दी गई है.
फर्जीवाड़े पर लगाम के लिए लगा चेहरे का पहरा
योजना को और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने 21 मई 2025 से एक बड़ा बदलाव किया. अब पीएमएमवीवाई में नए नामांकन के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है. यह सत्यापन पोषण ट्रैकर में मौजूद एफआरएस सिस्टम से किया जा रहा है. जिन इलाकों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां आधार FaceRD ऐप के जरिए UIDAI आधारित चेहरे की पहचान की जा रही है.
इस नई व्यवस्था के बाद अब तक 23.60 लाख लाभार्थियों का नामांकन एफआरएस के जरिए किया जा चुका है. सरकार का कहना है कि इससे फर्जी या दोहरे नामांकन की समस्या काफी हद तक खत्म हुई है और सही लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है. सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ट्रेनिंग सेशन भी कराए हैं. साथ ही, आंगनवाड़ी और फील्ड वर्कर्स के लिए वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध कराए गए हैं. इसके अलावा, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2025 तक एक विशेष नामांकन अभियान चलाया गया, जिसमें 4.63 लाख महिलाओं का एफआरएस सत्यापन के बाद नामांकन हुआ.
घर-घर पहुंचने की तैयारी: नियत सूची की शुरुआत
सरकार अब इंतजार नहीं कर रही कि लाभार्थी खुद दफ्तर आए. इसके लिए 1 जुलाई 2025 से ‘नियत सूची’ की शुरुआत की गई. पोषण ट्रैकर के डेटा के आधार पर गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की एक सूची बनाई जाती है, जिसे आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को दिया जाता है. फील्ड वर्कर को हर नाम पर कार्रवाई करनी होती है या तो पंजीकरण करना होता है या सही वजह बताकर नाम हटाना होता है. इस व्यवस्था के जरिए अब तक 15.81 लाख महिलाओं का नामांकन हो चुका है. कुल नामांकन का 75% से ज्यादा हिस्सा इसी नियत सूची से आया है.
शिकायत हो तो अब समाधान भी आसान
पीएमएमवीवाई में अब एक एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली भी शुरू की गई है. शिकायत दर्ज होते ही आवेदक को एसएमएस के जरिए टिकट नंबर मिल जाता है. शिकायत तीन तरीकों से दर्ज की जा सकती है, पहली- सीधे पीएमएमवीवाई पोर्टल पर जाकर, दूसरा- हेल्पलाइन नंबर 1515 पर कॉल करके और तीसरा- सीपीग्राम्स के जरिए. सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि 30 दिन के भीतर शिकायत का समाधान किया जाए. अब तक 60,000 से ज्यादा शिकायतों में से 85% मामलों का औसतन 19 दिन में समाधान हो चुका है.
आवेदन और भुगतान की स्थिति अब खुद देखें
पीएमएमवीवाई पोर्टल पर सर्च और ट्रैक मॉड्यूल की सुविधा दी गई है. लाभार्थी अपने मोबाइल नंबर या लाभार्थी आईडी से आवेदन और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं. अब तक 73 लाख से ज्यादा लोग इस सुविधा का इस्तेमाल कर चुके हैं.

