Saturday, May 30, 2026
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बचत की ओर बढ़ रहा भारत, म्‍यूचुअल फंड और शेयर बाजार में जुड़ेंगे 10 करोड़ नए निवेशक


नई दिल्‍ली. भारत वित्तीय परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा है. अगले 5-10 वर्षों में हमारे देश में लगभग 10 करोड़ नए मध्यम-वर्गीय और धनी परिवार निवेशक के रूप में जुड़ेंगे. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह परिवारों की एक बड़ी लहर है जो खर्चों के प्रबंधन के साथ बचत की ओर बढ़ रहा है. कई ऐसे संकेत हैं, जो बताते हैं कि आने वाले समय में निवेशक म्‍यूचुअल फंड और शेयर बाजार को अपना पसंदीदा गंतव्‍य बनाएंगे. इसके लिए लोगों में वित्‍तीय जानकारी बढ़ाना सबसे अहम होगा.

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि म्यूचुअल फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम 75 लाख करोड़ को पार कर गया है. एसआईपी निवेश हर महीने 28,500 करोड़ से ज्यादा हो रहा है और यूपीआई पर हर महीने 20 अरब से ज्यादा लेनदेन हो रहे हैं. पैसा पहले से कहीं ज्यादा सहजता से आगे बढ़ रहा है और भारतीय अपनी मेहनत की कमाई के साथ बाजारों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और निवेश उत्पादों पर भरोसा करने लगे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इन प्रोडक्‍ट तक लोगों की पहुंच भी आसान हो रही है, जिससे वे निवेश के लिए प्रेरित होते हैं.

वित्‍तीय अशिक्षा बड़ी चुनौती
एक तरफ तो देश में निवेशकों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है तो दूसरी ओर चौंकाने वाली कड़वी सच्‍चाई भी है. वैसे तो भारत में आज 63% परिवारों को कम से कम एक वित्तीय उत्पाद के बारे में जानकारी है, लेकिन म्यूचुअल फंड की वास्तविक पहुंच केवल 6.7% लोगों तक ही है. जागरूकता और अपनाने के बीच का यह अंतर हमारे दशक का सबसे बड़ा अवसर है और चुनौती भी. जरा सोचिए, लाखों परिवार जानते हैं कि वित्तीय उत्पाद मौजूद हैं, लेकिन बहुत कम लोग वास्तव में उनका उपयोग धन संचय के लिए कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि उन्हें मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग की आवश्यकता होती है. यहीं पर धन प्रबंधक, म्यूचुअल फंड वितरक (एमएफडी) और वित्तीय सलाहकार की निर्णायक भूमिका निभाएंगे.

सलाहकार की क्‍या है भूमिका
सलाहकार सिर्फ उत्पाद नहीं बेचते, वे लोगों को अनुशासित रहने, जोखिमों का प्रबंधन करने और जीवन के लक्ष्यों की योजना बनाने में मदद करते हैं. बच्चे की शिक्षा, सपनों का घर, आरामदायक सेवानिवृत्ति जैसे लक्ष्‍य को पूरा करने के लिए वित्‍तीय उत्‍पाद बेहतर साबित हो सकते हैं. दरअसल, आंकड़े पहले ही दिखा चुके हैं कि सलाह दी गई एसआईपी या डायरेक्ट प्लान की तुलना में ज्‍यादा समय तक चलती हैं और बेहतर प्रदर्शन करती हैं. सिर्फ इसलिए, क्योंकि सलाहकार व्यवहारिक सहयोग प्रदान करते हैं.

छोटे शहरों से आएंगे बड़े निवेशक
भारत में संपत्ति का भविष्य सिर्फ संख्याओं पर नहीं, बल्कि रिश्तों पर भी निर्भर करेगा. निवेशकों की अगली लहर सिर्फ बड़े शहरों से ही नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी आएगी. वे क्षेत्रीय भाषाओं में सलाह चाहेंगे. तकनीक प्लेटफॉर्म को मजबूत करेगी, लेकिन फैसलों को भरोसा ही ताकत देगा. ऐसे में सलाहकारों की एक नई श्रेणी तैयार करने का एक बार फिर बड़ा मौका मिलने वाला है. लिहाजा जो लोग म्‍यूचुअल फंड डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बनना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्‍छा मौका है. नए निवेशकों की सुनामी आ रही है, जो म्यूचुअल फंड वितरकों के लिए भी बड़ा अवसर होने वाला है.

राकेश भंडारी, निदेशक, निर्मल बंग सिक्योरिटीज



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