Last Updated:
Worship of Dogs: कर्नाटक के रामनगर जिले का अग्रहार वलगेरहल्ली गांव अपनी अनोखी आस्था के लिए जाना जाता है. यहां दो कुत्तों के नाम बना मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है. ग्रामीणों के अनुसार, सदियों पहले गांव के दो कुत्तों की मौत के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक दफनाया गया, जिसके बाद गांव में सुख-समृद्धि बढ़ी. लोगों का विश्वास है कि कुत्ते गांव की रक्षा कर रहे हैं.
Worship of Dogs: कर्नाटक का रामनगर जिला आमतौर पर चन्नापटना की रंग-बिरंगी लकड़ी के खिलौनों के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी जिले का एक छोटा सा गांव अग्रहार वलगेरहल्ली अपनी एक अनोखी मान्यता और मंदिर की वजह से चर्चा में रहता है. यहां लोग किसी देवी-देवता के नहीं, बल्कि दो कुत्तों के नाम बने मंदिर में पूजा करते हैं.
स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, यह कहानी कई सौ साल पुरानी मानी जाती है. कहा जाता है कि गांव में रहने वाले दो कुत्तों की अचानक मौत हो गई थी. गांव वालों ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ दफनाया और उनकी समाधि पर पत्थर रखे. इसके बाद धीरे-धीरे गांव में हालात बदलने लगे. फसलें अच्छी होने लगीं, लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरी और गांव में सुख-शांति बढ़ी. ग्रामीणों को विश्वास होने लगा कि ये दोनों कुत्ते अब गांव की रक्षा कर रहे हैं.
सपने में आकर मंदिर बनवाने के लिए कहा
समय के साथ यह विश्वास और गहरा होता चला गया. लोग उस जगह पर जाकर श्रद्धा से सिर झुकाने लगे. स्थानीय लोककथाओं और ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, साल 2010 में इस आस्था को एक नया रूप मिला. बताया जाता है कि गांव के एक व्यक्ति को सपने में गांव की आराध्य देवी केंपम्मा ने दर्शन दिए और कुत्तों के लिए एक मंदिर बनाने को कहा. इसके बाद गांव वालों ने मिलकर वहां एक छोटा सा मंदिर बनवाया, जिसमें पत्थर से बनी दो कुत्तों की मूर्तियां स्थापित की गईं.

कर्नाटक के रामनगर जिले का अग्रहार वलगेरहल्ली गांव में होती है दो कुत्तों की पूजा.
आज यह मंदिर सिर्फ गांव तक सीमित नहीं है. आसपास के इलाकों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आने लगे हैं. ग्रामीण मानते हैं कि यह मंदिर उन्हें बीमारियों, प्राकृतिक आपदाओं और बुरी नजर से बचाता है. मंदिर में रोजाना अगरबत्ती जलाई जाती है और विशेष मौकों पर पूजा-अर्चना होती है.
हर साल लगता है लोकविश्वास का बड़ा मेला
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हर साल यहां एक वार्षिक मेला भी लगता है, जिसमें अच्छी-खासी भीड़ जुटती है. मेले के दौरान पूजा, प्रसाद वितरण और लोक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम होते हैं. यह आयोजन गांव की सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है.
About the Author

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

