Saturday, April 25, 2026
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पप्पू यादव ने महिला आयोग के नोटिस को बताया निराधार: वापस लेने की मांग की, सांसद ने कहा था- ‘बड़े चैनलों के मालिक एंकरों का शोषण करते हैं’ – Patna News




पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने महिला आयोग के नोटिस का जवाब दे दिया है। उन्होंने महिला आयोग के नोटिस को कानून की दृष्टि से पक्षपातपूर्ण और निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह नोटिस जल्दबाजी में जारी किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जारी किया हुआ पत्र कानून के अनुसार मान्य नहीं है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। इसलिए कृपया इसे वापस ले लिया जाए। इस पर बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो.अप्सरा ने कहा, पप्पू यादव के वकील आज आयोग आए थे। उन्होंने पप्पू यादव की ओर से जवाब यहां पर जमा किया है। हमलोग अपने विधि परामर्शी का उनका जवाब भेज दिए हैं। सब कुछ आंकलन करने के बाद महिला आयोग देखेगी कि आगे इस पर क्या फैसला लिया जाए। पप्पू यादव के आयोग को भेजे गए जवाब की दलीलें बिहार राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा 10(एफ) के अनुसार, इसे स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है। नोटिस और संज्ञान दोनों अलग बातें हैं। स्वतः संज्ञान लेना बिहार राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा 10(एफ) के शाब्दिक अर्थ और भावना के अनुरूप नहीं है, अतः यह अवैध है। नोटिस के आधार पर सोशल मीडिया वीडियो के संबंध में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि वीडियो किस डेट को प्रसारित हुआ था। यह भी नहीं बताया गया है कि वीडियो किस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया था। इन महत्वपूर्ण तथ्यों के अभाव में, ऐसा प्रतीत होता है कि नोटिस अपर्याप्त सामग्री के आधार पर जल्दबाजी में जारी किया गया था। जब भी कोई मामला स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया जाता है, तो स्वतः संज्ञान लेने वाला व्यक्ति ही शिकायतकर्ता बन जाता है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। जवाब में कहा-पप्पू यादव ने हमेशा महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया महिला आयोग का नोटिस कानून की दृष्टि से पक्षपातपूर्ण और निराधार प्रतीत होता है। पप्पू यादव ने हमेशा महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया है। उन्होंने भ्रष्ट राजनेताओं के खिलाफ आवाज उठाई है जो राजनीति में महिलाओं का यौन शोषण करते हैं। इस आयोग को उन राजनेताओं के खिलाफ नोटिस जारी करना चाहिए जो राजनीति में महिलाओं का यौन शोषण कर रहे हैं। यह निवेदन किया जाता है कि यदि मीडिया बयान की पूरी सामग्री कानून के अनुसार पप्पू यादव को उपलब्ध कराई जाए, तो वे इस मामले पर अपना उत्तर दे सकते हैं। इन परिस्थितियों में निवेदन है कि संदर्भित पत्र कानून के अनुसार मान्य नहीं है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कृपया इसे वापस ले लिया जाए। पप्पू यादव के बयान पर मचा था बवाल पप्पू यादव ने 20 अप्रैल को महिला आरक्षण पर विवादित बयान दिया था। पप्पू यादव ने कहा था कि महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। देश में यौन शोषण के मामलों में नेताओं की बड़ी भूमिका है और कई सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं। पप्पू यादव ने कहा था कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड से शुरू होता है। उन्होंने महिला नेताओं पर दिए अपने बयान को 21 अप्रैल को भी दोहराया। पप्पू यादव को महिला आयोग ने भेजा था नोटिस पप्पू यादव के बयान पर 21 अप्रैल को बिहार महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया था। सांसद को नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा था। साथ ही पूछा- क्यों ना आपकी लोकसभा की सदस्यता खत्म हो जाए? आयोग ने नोटिस में कहा था- ‘अगर उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो एक प्रतिनिधिमंडल स्पीकर ओम बिरला से मिलेगा और उनकी सांसदी रद्द करने की सिफारिश करेगा।’ वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख विजया रहाटकर ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए माफी मांगने के लिए कहा है। महिला आयोग की इस कार्रवाई पर पप्पू यादव भड़क गए। 22 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमने महिला आयोग के नोटिस को फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया है। कोई जवाब नहीं दूंगा।



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