Tuesday, May 26, 2026
Homeफूडहिमाचल की इस धुएं वाली चाय का स्वाद पीते ही भूल जाएंगे...

हिमाचल की इस धुएं वाली चाय का स्वाद पीते ही भूल जाएंगे नॉर्मल टी, जानें रेसिपी


Last Updated:

हिमाचल की वादियों में बनने वाली “लुगड़ी चाय” एक अनोखी धुएं वाली पारंपरिक चाय है, जो लकड़ी के चूल्हे पर तैयार होती है. इसका हल्का स्मोकी स्वाद और देसी खुशबू इसे सामान्य चाय से बिल्कुल अलग बना देती है. ठंडे मौसम में इसे पीना एक अलग ही सुकून देता है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

हिमाचल प्रदेश अपनी खूबसूरती, पहाड़ों और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है. लेकिन यहां की एक खास चीज इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रही है, जिसे “लुगड़ी चाय” या धुएं वाली पारंपरिक चाय कहा जाता है. यह कोई आम चाय नहीं है, बल्कि इसकी तैयारी और स्वाद दोनों ही इसे बेहद अलग और खास बनाते हैं. एक बार अगर आपने इसे पी लिया, तो सामान्य दूध वाली चाय का स्वाद आपको फीका लग सकता है.

लुगड़ी चाय हिमाचल के कुछ ग्रामीण इलाकों में बनने वाली एक पारंपरिक चाय है, जिसे खास तरीके से लकड़ी की आग पर तैयार किया जाता है. इसमें चाय पत्ती, दूध, गुड़ या कभी-कभी स्थानीय जड़ी-बूटियां डाली जाती हैं. लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे सीधे गैस या इलेक्ट्रिक स्टोव पर नहीं बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर लंबे समय तक उबालकर बनाया जाता है. इसी प्रक्रिया में इसमें हल्का सा धुएं का स्वाद आ जाता है, जो इसे एक अलग ही पहचान देता है.

क्यों कहा जाता है इसे “धुएं वाली चाय”?
इस चाय को धुएं वाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे तैयार करते समय लकड़ी के चूल्हे का धुआं धीरे-धीरे इसके स्वाद में घुल जाता है. पहाड़ी इलाकों में जब लोग ठंडे मौसम में आग के पास बैठकर इस चाय को पीते हैं, तो इसका स्वाद और भी गहरा और सुकून देने वाला लगता है. यही वजह है कि इसे सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि एक अनुभव माना जाता है.

स्वाद और खुशबू में क्या है खास?
लुगड़ी चाय का स्वाद सामान्य चाय से बिल्कुल अलग होता है. इसमें हल्की स्मोकी खुशबू होती है जो पीने वाले को पहाड़ों की मिट्टी और लकड़ी की आग की याद दिलाती है. यह चाय न तो बहुत मीठी होती है और न ही बहुत तीखी. इसका बैलेंस्ड स्वाद ही इसे खास बनाता है. कई लोग इसे सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए भी पीते हैं.

हिमाचल की संस्कृति से जुड़ा स्वाद
यह चाय सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि हिमाचल की लोक संस्कृति का हिस्सा है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सुबह और शाम इसे पीना पसंद करते हैं. यह चाय लोगों को एक साथ बैठने, बातचीत करने और ठंड से बचने का बहाना भी देती है. यही वजह है कि इसे सामाजिक जुड़ाव का हिस्सा भी माना जाता है.

About the Author

authorimg

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments