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Gonda News: आचार्य पीके शुक्ला का मानना है कि प्राकृतिक चिकित्सा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती है. सही आहार, नियमित व्यायाम, योग और प्राकृतिक उपायों को दिनचर्या में शामिल करके व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकता है. गोंडा में इस सुविधा की शुरुआत को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पहली बार प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) की सुविधा शुरू की गई है. इससे जिले के लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक वैकल्पिक उपचार पद्धति का विकल्प मिलेगा. प्राकृतिक चिकित्सा ऐसी प्रणाली है, जिसमें शरीर को स्वस्थ रखने और रोगों से राहत दिलाने के लिए प्रकृति के विभिन्न तत्वों का उपयोग किया जाता है.
लोकल 18 से बातचीत में आचार्य पीके शुक्ला ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है. इस पद्धति में दवाओं के उपयोग पर कम और प्राकृतिक जीवनशैली पर अधिक जोर दिया जाता है. इसमें संतुलित आहार, योग, प्राणायाम, व्यायाम, जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा और अन्य प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जाता है.
आचार्य पीके शुक्ला के अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा इस सिद्धांत पर आधारित है कि मानव शरीर में स्वयं को स्वस्थ करने की क्षमता होती है. यदि व्यक्ति सही खानपान और नियमित दिनचर्या अपनाए तो शरीर कई समस्याओं से खुद ही मुकाबला कर सकता है. इसी वजह से इस उपचार पद्धति में जीवनशैली में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता है. उनके केंद्र पर लिवर और किडनी डिटॉक्स की सुविधा उपलब्ध है. इसके साथ ही क्लींजिंग थेरेपी भी कराई जाती है. इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य शरीर में जमा अवांछित तत्वों को बाहर निकालना और शरीर को अधिक सक्रिय व स्वस्थ बनाना है.
प्राकृतिक चिकित्सा में जल चिकित्सा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है. इसमें पानी के विभिन्न रूपों का उपयोग कर शरीर को आराम देने और स्वास्थ्य में सुधार करने की कोशिश की जाती है. वहीं मिट्टी चिकित्सा में शरीर के कुछ हिस्सों पर मिट्टी का लेप लगाया जाता है, जिसे कई लोग लाभकारी मानते है. आचार्य पी.के. शुक्ला बताते है कि उनके यहां लिवर, किडनी, पेट से जुड़ी समस्याओं और पित्त की पथरी का इलाज बिना ऑपरेशन के किया जाता है. उनके अनुसार 16 घंटे के भीतर ही असर दिखना शुरू हो जाता है.
उन्होंने बताया कि मरीजों को दिन में हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है. इसके बाद उन्हें शाम 5:00 बजे केंद्र पर बुलाया जाता है और सुबह तक रखा जाता है. लगभग 15 से 16 घंटे केंद्र पर रहने के दौरान शरीर के अंदर जमा कचरा मल-मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाता है और मरीज को काफी आराम महसूस होता है. उनका दावा है कि जब शरीर डिटॉक्स हो जाता है तो हार्ट अटैक की संभावना बहुत कम हो जाती है. उनका कहना है कि लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा की ओर बढ़ना चाहिए, क्योंकि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता.
योग और प्राणायाम भी प्राकृतिक चिकित्सा का अहम हिस्सा है. नियमित योग और श्वास संबंधी अभ्यास न केवल शरीर को फिट रखने में मदद करते है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करते है. इसके साथ ही संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम को स्वस्थ जीवन की बुनियाद माना जाता है.
गोंडा में इस सुविधा की शुरुआत से उन लोगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है जो प्राकृतिक तरीकों से स्वास्थ्य सुधारना चाहते है. अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग अपने ही जिले में इस उपचार पद्धति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार इसका लाभ उठा सकेंगे. आचार्य पीके शुक्ला का मानना है कि प्राकृतिक चिकित्सा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती है. सही आहार, नियमित व्यायाम, योग और प्राकृतिक उपायों को दिनचर्या में शामिल करके व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकता है. गोंडा में इस सुविधा की शुरुआत को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है.

