Wednesday, June 3, 2026
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India Nepal Relations: पीएम मोदी ने सेट कर दिया नेपाल से रिश्तों का नया टोन


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नेपाल के सत्‍ताधारी दल केनेता रबी लामिछाने की दिल्ली यात्रा से जो सबसे बड़ा संदेश निकलकर सामने आता है, वह यह है कि प्रधानमंत्री मोदी नेपाल के साथ रिश्तों को नए ढंग से परिभाषित करना चाहते हैं. पीएम मोदी ने नेपाल के नेताओं को संकेत दिया है कि अगर नेपाल भविष्य की राजनीति को विकास के रास्ते पर ले जाना चाहता है, तो भारत उसका सबसे भरोसेमंद साझेदार बनने के लिए तैयार है.

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नेपाल की सत्‍ताधारी पार्टी के चीफ द‍िल्‍ली पहुंचे तो पीएम मोदी से मुलाकात की.

भारत-नेपाल के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद, राजनीतिक अस्थिरता और चीन की बढ़ती मौजूदगी जैसे मुद्दे हावी रहे हैं. लेकिन सत्‍ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चीफ रबी लामिछाने की दिल्ली यात्रा ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब नेपाल के साथ संबंधों का नया फ्रेमवर्क तैयार करना चाहते हैं. यह फ्रेमवर्क विवादों से ज्यादा विकास, निवेश और राजनीतिक स्थिरता पर आधारित दिखाई देता है.नेपाल के नेताओं ने भी मैसेज द‍िया क‍ि व‍िवाद दूर की बात है, हमें साथ चलकर व‍िकास करना चाह‍िए.

नेपाल के किसी विपक्षी या गैर-पारंपरिक नेता को भारत में शायद ही कभी इतना महत्व मिला हो. रबी लामिछाने की मुलाकात सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी तक सीमित नहीं रही. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और भाजपा नेतृत्व से भी बातचीत की. यह दिखाता है कि भारत नेपाल की नई राजनीतिक शक्तियों को समझने और उनके साथ सीधे संवाद स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है. असल में भारत ने यह संकेत दिया है कि वह सिर्फ पुराने राजनीतिक चेहरों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि नेपाल में उभर रही नई राजनीतिक ताकतों के साथ भी रिश्ते मजबूत करेगा.

मोदी का संदेश- प्राथमिकताएं तय करो, भारत साथ खड़ा है

प्रधानमंत्री मोदी ने लामिछाने से कहा कि नेपाल अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करे, भारत हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है. यह बयान सामान्य कूटनीतिक टिप्पणी नहीं है. इसके पीछे एक स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है. भारत नेपाल को यह बताना चाहता है कि यदि काठमांडू विकास, आर्थिक प्रगति, ऊर्जा और पर्यटन को प्राथमिकता देता है तो दिल्ली उसका सबसे बड़ा साझेदार बनने को तैयार है. यानी रिश्तों का आधार अब केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी भी होगा.





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