औरंगाबाद में मुहर्रम को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने को लेकर बुधवार को जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने की। इस दौरान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस किसी भी जुलूस की अनुमति नहीं दी जाएगी। डीजे और बाइक जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संतन कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष मुहर्रम पर्व 26 और 27 जून को मनाया जाएगा। पर्व के दौरान छोटी-छोटी घटनाओं को लेकर विवाद की संभावना बनी रहती है, इसलिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। लाइसेंस में निर्धारित समय, मार्ग और शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पूर्व प्रशासनिक अनुमति लेना जरूरी होगा। दोनों समुदायों से भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग की अपील की। अफवाह फैलाने वालों पर रहेगी कड़ी नजर जिला पदाधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। आम लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या घटना की तत्काल सूचना प्रशासन को देने की अपील की। पर्व के दौरान निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन का भी उपयोग किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त चौकसी प्रशासन ने सभी संवेदनशील एवं चिन्हित स्थलों पर आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग करने, पुलिस गश्ती बढ़ाने और जुलूस मार्गों को अतिक्रमणमुक्त रखने का निर्देश दिया है। ताजिया जुलूस केवल निर्धारित मार्ग और निर्धारित समय के अनुसार ही निकाला जाएगा। किसी भी प्रकार के हथियारों के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महत्वपूर्ण स्थलों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो जुलूस की समाप्ति तक अपने-अपने क्षेत्रों में तैनात रहेंगे। जुलूस मार्गों का होगा निरीक्षण जिला पदाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जुलूस मार्गों का भौतिक सत्यापन कर संभावित विवादों की समीक्षा के बाद ही अनुज्ञप्ति जारी की जाए। सभी जुलूसों का शत-प्रतिशत लाइसेंसी होना अनिवार्य होगा। साथ ही विद्युत विभाग को जुलूस मार्गों पर बिजली के तारों और पोलों की जांच कर आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया गया। बैठक में सांप्रदायिक दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष चौकसी बरतने, शांति समिति को सक्रिय रखने तथा विभिन्न समुदायों के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया। जिला पदाधिकारी ने ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर निगरानी रखने का निर्देश दिया जिनका पूर्व में सामाजिक या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का इतिहास रहा है। धर्म, जाति, भाषा या अन्य आधारों पर नफरत फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या विधि-व्यवस्था भंग करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, अपर समाहर्ता आपदा उपेंद्र पंडित, अपर समाहर्ता मोहम्मद सादुल हसन खां, एसडीओ संतन कुमार सिंह, एसडीओ अमित राजन, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं शांति समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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