बजरंग नगर का पूरा इलाका हाइवे बनने के बाद नरक बन गया है। सीवर की समस्या ऐसी है कि लोग घर बेचकर जा रहे हैं। पार्षद जी ने तीन साल में इस इलाके में झांका नहीं…। ये दर्द वार्ड-52 लोहता के निवासियों का है। उनका यह भी आरोप है कि पार्षद विकास कार्य में भी पक्षपात करती हैं। वाराणसी का यह वार्ड तीन साल पहले शहर का हिस्सा बना था। लोगों को उम्मीद थी कि इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उल्टे हाईवे निकलने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ गई। करीब पांच फीट ऊंची बनी सड़क और बंद हो चुकी जल निकासी के कारण 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। कई घरों के शौचालय तक मलजल से भर चुके हैं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा में लोगों ने बताया कि रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का सीवर भी इसी लाइन में जोड़ दिया गया है। बेटी ताल को पाटे जाने से पानी निकलने का आखिरी रास्ता भी खत्म हो गया। लोगों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ी हैं, जबकि ग्राम प्रधान के समय छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान जल्दी हो जाता था। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-52 का जायजा लिया गया… हाइवे से जुड़ी 19 गलियां सालभर सीवर और बारिश के पानी में डूबी मिलीं। बजरंग नगर में कई घरों के शौचालयों तक सीवर का पानी भरने से लोगों ने उनका इस्तेमाल बंद कर दिया है। रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का मलजल जोड़ने के कारण सड़कें और गलियां जलमग्न नजर आईं। धमरिया में जाम नाला बारिश के दौरान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है। वहीं खाली प्लॉटों और गलियों में कूड़े के ढेर पड़े मिले, जिससे नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। पहले ये नजारा देखिए… हाइवे बना, लेकिन बंद हो गई जल निकासी स्थानीय लोगों का कहना है कि हाइवे बनने के दौरान सड़क करीब पांच फीट ऊंची बना दी गई, जबकि पुरानी बस्ती पहले से नीचे थी। इससे सीवर और नालियां बेअसर हो गईं। बारिश के दिनों में पानी घरों और गलियों में भर जाता है। कई जगह शौचालयों तक मलजल पहुंच जाता है और लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। वार्ड की बड़ी समस्याएं सीवर और जलभराव: 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। बेटी ताल पर कब्जा: जल निकासी का प्रमुख स्रोत खत्म होने से हालात और बिगड़े। धन्नीपुर का सीवर: दूसरे गांव का मलजल रहीमपुर की लाइन में जोड़ने से संकट बढ़ा। पेयजल संकट: दो टंकियों से पूरे वार्ड में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। सफाई व्यवस्था: गलियों में नियमित सफाई नहीं, खाली प्लॉटों में कूड़े के ढेर। लोग बोले- सड़क ऊंची होने से डूबने इलाका निजाम खान ने बताया कि धन्नीपुर का पानी जोड़ने और सड़क ऊंची होने से पूरा इलाका डूबने लगा है। सिकंदर खान ने कहा कि दूसरे गांव का पानी हमारे मोहल्ले में छोड़ा जा रहा है। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे। सुनील यादव के मुताबिक सीवर के पानी और कीचड़ से ग्राहक नहीं आते। कारोबार प्रभावित हो गया है। नहीं हो रही नाले की सफाई, घरों तक भर रहा पानी रशीद अहमद ने कहा कि धमरिया में नाले की सफाई नहीं होती। बारिश में घरों तक पानी भर जाता है। रियाज ने बताया कि गलियों में न सफाई होती है, न इंटरलॉकिंग। नगर निगम सिर्फ मुख्य सड़क तक सीमित है। एखलाक अहमद के अनुसार नगर पंचायत बनती तो बेहतर होता। नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ गईं। पार्षद कभी झांकने नहीं आते शकील ने बताया कि पार्षद कभी गलियों में नहीं आते। सिर्फ सड़क तक दौरा करके लौट जाते हैं। जमाल अहमद का कहना है कि धमरिया का नाला मकानों के लिए खतरा बन गया है। बारिश में नाला फैल जाता है। इस्लामुद्दीन ने बताया कि नाले के किनारे सड़क है, लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं। रात में हादसे का डर बना रहता है। मोहम्मद रियाज ने कहा कि नाले की सिर्फ ऊपर-ऊपर सफाई होती है, सिल्ट नहीं निकाली जाती। रहीमपुर में दूसरे गांव का सीवर बना आफत रहीमपुर के लोगों का आरोप है कि धन्नीपुर गांव का सीवर भी उनकी लाइन में जोड़ दिया गया। पहले यह पानी बेटी ताल में जाता था, लेकिन तालाब पाट दिए जाने के बाद पूरा दबाव रहीमपुर पर आ गया। नतीजा, सड़कें और घर लगातार सीवर के पानी में डूबे रहते हैं। बेटी ताल पटा, खत्म हुआ पानी निकलने का रास्ता स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेटी ताल पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया। पहले पूरे इलाके का अतिरिक्त पानी इसी ताल में जाता था, लेकिन अब वहां मलबा डाल दिया गया है। इससे जल निकासी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। पेयजल और सफाई व्यवस्था भी बदहाल धमरिया की दो पानी टंकियों से पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन दूर के इलाकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। लोग समर्सिबल लगाने को मजबूर हैं। सफाईकर्मी मुख्य सड़क तक ही सीमित रहते हैं, जबकि गलियों में नियमित सफाई नहीं होती। ————— ये खबर भी पढ़िए… जिस वार्ड से गुजरते करोड़ों श्रद्धालु उसके रास्ते दलदल जैसे:वार्ड-9 में कच्ची सड़कें, उफना रहे सीवर; इसी वार्ड से है संगम का रास्ता प्रयागराज का वो वार्ड भी बदहाल है जहां से होकर महाकुंभ का रास्ता गुजरता है। करोड़ों श्रद्धाल इसी वार्ड से होकर संगम तक पहुंचते हैं। वार्ड-9 सोनौटी को तीन साल पहले निगम में शामिल किया गया था, लेकिन हालात आज भी गांव जैसे हैं। वार्ड में पक्की सड़कें नाम मात्र ही हैं। नालियां सालों से चोक हैं। कई इलाकों में बिजली के खंभे तक नहीं लगे। बारिश होते ही गलियां दलदल बन जाती हैं। घरों के सामने सीवर व नालियों का गंदा पानी भर जाता है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न प्रशासन सुन रहा है और न ही पार्षद। पूरी खबर पढ़ें… ————— ये खबर भी पढ़िए… वार्ड-88 में लोग बोले-द्वेष भावना से काम करा रहे पार्षद:10 महीने से 150 परिवार साफ पानी को तरस रहे; धर्म के आधार पर सुविधाएं देने का आरोप वाराणसी का सबसे घनी आबादी वाला वार्ड-88 सुविधाओं में बहुत पिछड़ा नजर आ रहा है। कुछ हिस्सों की हालत ज्यादा खराब है। यहां के लोगों का कहना है कि पार्षद द्वेष भावना से काम कर रहे हैं। धर्म के आधार पर लोगों को लाभ दिया जा रहा है। काल भैरव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बसे वार्ड बलुआबीर में न तो पीने का साफ पानी है न ही सीवर व्यवस्था। चिकवन टोला में 10 महीने से मिनी ट्यूबवेल खराब है। 150 से अधिक परिवारों को इससे परेशानी हो रही है। नलों से सीवर मिला बदबूदार पानी आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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वार्ड की 19 गलियों में पूरे साल रहता जलभराव: वार्ड-52 के लोग बोले- निगम में शामिल होने के बाद बढ़ीं समस्याएं, हाईवे ने किया नरक – Varanasi News
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