Friday, August 7, 2026
Homeराज्यउत्तरप्रदेशपांच कसौटियों पर परखी जाती है मतदाता सूची: आगरा में मुख्य...

पांच कसौटियों पर परखी जाती है मतदाता सूची: आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त बोले, ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर भ्रम फैलाना बेबुनियाद है – Agra News




मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी आधारशिला है। मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और विदेशी नाम हटाकर उसे लगातार अपडेट किया जाता है। यही पारदर्शी प्रक्रिया भारत की चुनाव प्रणाली को दुनिया के लिए मिसाल बनाती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम पर भ्रम फैलाना बेबुनियाद है। आगरा में नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के 78वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी संस्था है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 95 करोड़ मतदाता हैं और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए पांच श्रेणियों—अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और विदेशी मतदाताओं—के नाम लगातार हटाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के अधीन करीब 1.80 करोड़ अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी व्यवस्था बन जाती है। इतने बड़े तंत्र के बीच समन्वय के लिए आयोग ने ईसीआईनेट (ECINet) सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जिसे अब तक करीब 12 करोड़ लोग डाउनलोड कर चुके हैं। ज्ञानेश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कहा कि देशभर में करीब 12 लाख बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची तैयार करते हैं। इसका सत्यापन राजनीतिक दलों के बूथ एजेंट भी करते हैं। मतदान से पहले मॉक पोल कराया जाता है, ईवीएम सील होती है और मतगणना से पहले सभी सीलों की जांच एजेंटों की मौजूदगी में की जाती है। उन्होंने विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशत का उल्लेख करते हुए कहा कि कई देशों में मतदान अनिवार्य होने और जुर्माने के प्रावधान के बावजूद मतदान प्रतिशत भारत के कुछ राज्यों से कम है। पश्चिम बंगाल में बिना किसी जुर्माने के 93.7 प्रतिशत मतदान इसका उदाहरण है। ईवीएम और चुनाव आयोग पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “सूरज पश्चिम से नहीं उग सकता।” उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का नैरेटिव बनाया जा सकता है, लेकिन चुनाव आयोग संविधान के दायरे में पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है और उसे इस तरह के दुष्प्रचार से कोई फर्क नहीं पड़ता।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments