Thursday, September 3, 2026
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कोडीन कफ सिरप बेचने वाला अन्तर्राज्यीय गैंग पकड़ा: एसटीएफ ने तीन करोड़ के सिरप के साथ चार तस्करों को गिरफ्तार किया – Prayagraj (Allahabad) News




यूपी में कोडीन कफ सिरप सप्लाई का गोरखधंधा थम नहीं रहा है। यूपी एसटीएफ ने गुरुवार को अवैध कफ सिरप की सप्लाई करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर एसटीएफ ने उनके कब्जे से अवैध कफ सिरप ONEREX BRAND 250 पेटी बरामद किया है। बरामद कफ सिरप की कीमत 3 करोड़ रुपये है। तस्करी में इस्तेमाल डीसीएम व नेक्सॉन कार भी बरामद हुई है। यूपी एसटीएफ की प्रयागराज यूनिट को काफ दिनों से सूचना मिल रही थी कि कोडीन कफ सिरप को अन्तर्राज्यीय गिरोह द्वारा दिल्ली, हरियाणा व चण्डीगढ़ से तस्करी कर बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में लाया जा रहा है। एसटीएफ इंस्पेक्टर जय प्रकाश राय के नेतृत्व में टीम ने प्रयागराज से बांदा रूट पर जांच और छापेमारी शुरू की। इंस्पेक्टर जय प्रकाश राय के मुताबिक, बिसण्डा अतर्रा रोड चौराहा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे पर डीसीएम रोक तलाशी ली गई तो उसमें कोडीन सिरप भरा मिला। इसी के साथ टाटा नेक्सॉन को पकड़ा गया। दोनों गाड़ियों से चार तस्कर पकड़े गए। पूछताछ में तस्करों ने कबूल किया कि कोडीन कफ सिरप के रैपर को परिवर्तित कर महंगे दामों में सप्लाई व बिकी करते हैं। कोडीन कफ सिरप की सप्लाई व बिकी के कागजात जीएसटी इनवाईस बिल को उनके द्वारा कूटरचना करके OM MEDICAL AGENCY GATA NO 82 VILL TEDHA HAMIRPUR DIST HAMIRPUR UP के नाम पर तैयार किया जाता है। पकड़े गए आरोपी धीरेन्द्र कुमार पुत्र भागवत प्रसाद कुशवाहा निवासी ग्राम नाहर पुरवा, थाना बिसण्डा, बांदा। प्रवीण कुमार उर्फ लकी पुत्र दयाराम गुप्ता निवासी लखन कालोनी अतर्रा, थाना अतर्रा, बांदा। रोहित पाण्डेय पुत्र कल्लू राम पाण्डेय निवासी शास्त्री नगर रामलीला मैदान अतर्रा, बांदा। शेखर सिंह पुत्र राजकुमार निवासी ग्राम भैना बहादुरगढ़ गढ़मुक्तेश्वर, हापुड। कोडीन सिरप से जुड़ी हाईकोर्ट की सुनवाई भी जानें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप को लेकर अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने न्यू फेंसेडिल, एस्कुफ, कोडेक्टस, लाइकारेक्स-टी समेत कोडीन आधारित कफ सिरप से जुड़े 76 जमानत मामलों पर एक साथ सुनवाई की। कोर्ट के सामने मुख्य सवाल था कि क्या 0.2 प्रतिशत से कम कोडीन वाला ऐसा कफ सिरप, जिसका चिकित्सा उपयोग स्थापित है, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के दायरे में आएगा या नहीं। मेडिकल इस्तेमाल में बेचने-भेजने पर NDPS एक्ट नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मात्रा वाला कोडीन युक्त कफ सिरप यदि चिकित्सीय उपयोग के लिए बेचा या भेजा जाता है, तो उसे मादक पदार्थ नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में केवल इस आधार पर NDPS एक्ट लागू नहीं किया जा सकता। आवेदकों की ओर से दलील दी गई कि इस तरह का सिरप NDPS एक्ट में बताए गए “मैन्युफैक्चर्ड ड्रग” की परिभाषा में नहीं आता। ऐसे मामलों में कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत होनी चाहिए। नशे के लिए रखा तो पूरा मिश्रण ‘कोडीन तैयारी’ राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने तर्क दिया कि यदि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए या नशे के उद्देश्य से कोडीन सिरप बेचा या ले जाया जाता है, तो NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि यदि यही सिरप नशे के लिए भंडारित, बेचा या परिवहन किया जाता है, तो पूरे मिश्रण को “कोडीन तैयारी” माना जाएगा और NDPS एक्ट लागू होगा। बिना पर्ची सामान्य बिक्री पर ड्रग्स एक्ट लागू हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य मेडिकल दुकान से बिना डॉक्टर की पर्ची के कोडीन युक्त कफ सिरप बेचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन होगा। सिर्फ इस आधार पर NDPS एक्ट नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि कम समय में बड़ी मात्रा में सिरप की बिक्री की जाती है, तो इससे दुकानदार की मंशा पर सवाल उठ सकता है और परिस्थितियों के आधार पर NDPS एक्ट लागू होने की स्थिति बन सकती है। भोला प्रसाद की जमानत खारिज, 7.5 लाख बोतलों की तस्करी का आरोप इन मामलों में मुख्य आवेदक भोला प्रसाद, जो रांची के साईं ट्रेडर्स के प्रोपराइटर हैं, की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट के सामने प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य रखे गए, जिनके मुताबिक सोनभद्र में करीब 7.5 लाख बोतल कोडीन कफ सिरप फर्जी फर्मों के जरिए डायवर्ट किया गया। जांच में सामने आया कि सिरप को सोनभद्र भेजने के बजाय बिहार, बांग्लादेश और अन्य स्थानों पर भेजा गया था। ड्राइवर-गार्ड समेत कई को मिली जमानत 76 जुड़े मामलों में अधिकांश ड्राइवर, खलासी, गार्ड और निचले स्तर के कर्मचारियों को जमानत दी गई। इन मामलों में कोर्ट ने पाया कि कफ सिरप पैक कार्टन में छिपाकर रखा गया था, लेकिन आरोपियों को इसकी जानकारी होने के ठोस प्रमाण नहीं मिले। वहीं, जिन आरोपियों पर फर्जी फर्में बनाकर बड़े पैमाने पर सिरप डायवर्ट करने, जाली दस्तावेज तैयार करने या संगठित सिंडिकेट चलाने के ठोस प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, उनकी जमानत अर्जियां खारिज कर दी गईं।



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