Last Updated:
भारत की GDP ग्रोथ को लेकर उठे सवालों के बीच IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अब तक मजबूत बताया है. IMF की प्रवक्ता जूली कोजाक ने कहा कि महंगे कच्चे तेल से भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव पड़ता है, लेकिन भारत ने इस झटके को काफी मजबूती से संभाला है. वहीं, सरकार ने 7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों का बचाव करते हुए नई कैलकुलेशन को ज्यादा बेहतर बताया है. अब अक्टूबर में नए अनुमान से भारत की आर्थिक ग्रोथ की तस्वीर और साफ होगी.
भारत की GDP ग्रोथ को लेकर उठे सवालों के बीच IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अब तक मजबूत बताया है.
31 अगस्त को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की तेज ग्रोथ दर्ज की गई. अप्रैल से जून के बीच GDP की यह बढ़ोतरी पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले रही. उम्मीद से बेहतर आए इन आंकड़ों ने एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दिया, तो दूसरी तरफ GDP की कैलकुलेशन और आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई. कुछ पूर्व अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों ने सवाल उठाया कि क्या 7.8% की ग्रोथ देश की जमीनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह दिखाती है.
इसी बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में भारत की आर्थिक स्थिति पर बात की. उन्होंने कहा कि देश अब ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से निकलकर ‘पॉलिसी डायनामिज्म’ की तरफ बढ़ चुका है. पीएम ने 7.8% की तिमाही ग्रोथ को देश के बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत बताया. उन्होंने कहा कि कभी भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ में गिना जाता था, लेकिन आज दुनिया उसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर देख रही है. पीएम ने भारत की तेज आर्थिक विकास दर पर सवाल उठाने वालों के लिए ‘नाराज फूफा’ वाली बात भी कही थी. अब IMF ने भी भारत की अर्थव्यवस्था में दिख रही मजबूती और महंगे तेल के असर को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है.
IMF ने भारत की इकोनॉमी पर क्या कहा?
IMF की प्रवक्ता जूली कोजाक ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से उन देशों पर दबाव पड़ता है, जो अपनी एनर्जी की जरूरतों के लिए तेल आयात करते हैं. इससे देश के विदेशी भुगतान और सरकारी वित्त पर असर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत में यह झटका ऐसे समय आया है, जब देश की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत है.
#WATCH | Julie Kozack, Spokesperson, International Monetary Fund (IMF), says, “When energy or oil prices increase, it puts pressure on the balance of payments of energy importers and can also affect their fiscal positions… In India’s case, the shock has occurred at a time when… pic.twitter.com/UDZQuEKFgG

