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Papad Dana Methi Sabji: जालोर की पारंपरिक रसोई में बनने वाली पापड़-दाना मेथी की सब्जी कम सामग्री में तैयार होने वाला बेहद स्वादिष्ट देसी व्यंजन है. दाना मेथी, मसालों और सेंके हुए पापड़ से बनने वाली यह सब्जी खासकर बारिश के मौसम में खूब पसंद की जाती है. गरमा-गरम रोटी के साथ इसका स्वाद राजस्थानी देसी खाने की याद दिला देता है.
जालोर. राजस्थान की पारंपरिक रसोई में ऐसी कई सब्जियां हैं, जो कम सामग्री और कम समय में तैयार हो जाती हैं, लेकिन स्वाद में किसी से कम नहीं होती. इन्हीं देसी स्वादों में शामिल है पापड़-दाना मेथी की सब्जी. घर में आसानी से उपलब्ध चीजों से बनने वाली यह सब्जी जालोर के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक स्वाद के साथ बनाई और खाई जाती है. बारिश के मौसम में जब हरी सब्जियों की आवक कम हो जाती है, तब घर में रखी दाना मेथी और पापड़ जैसी सामग्री से बनने वाली सब्जियों की याद आती है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय या बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. घर के सामान्य मसालों और थोड़े से तेल के साथ यह सब्जी जल्दी तैयार हो जाती है.
गृहिणी प्रीति सैन ने लोकल18 को बताया कि पापड़-दाना मेथी हमारे यहां काफी समय से बनाई जाती है. इसे बनाने में ज्यादा सामान नहीं लगता और स्वाद भी बहुत अच्छा आता है. खासकर जब हरी सब्जी आसानी से नहीं मिलती, तब घर में रखे सामान से यह सब्जी झटपट तैयार हो जाती है. इसे गरम रोटी के साथ खाना ज्यादा पसंद किया जाता है, यह सब्जी पाचन के लिहाज से भी हल्की रहती है और ये सब्जी राजस्थान की पारंपरिक सब्जियों में भी शामिल है.
इसे बनाने के तरीका भी बहुत आसान
सबसे पहले दाना मेथी को पानी में उबाल लिया जाता है. इसके बाद कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म किया जाता है. तेल गर्म होने पर इसमें लहसुन का तड़का लगाया जाता है. तड़का लगते ही घर में इस्तेमाल होने वाले मसाले डालकर उन्हें अच्छी तरह भुना जाता है. मसाले तैयार होने के बाद इसमें उबली हुई दाना मेथी डाल दी जाती है. जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर सब्जी को अच्छी तरह उबलने दिया जाता है, ताकि मसाले और मेथी का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए.
इस सब्जी की खासियत इसमें डाला जाने वाला पापड़ है, पापड़ को पहले सेंक लिया जाता है. इसके बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर रखा जाता है. जब दाना मेथी की सब्जी अच्छी तरह उबल जाए और मसाला पक जाए, तब आखिर में सेंके हुए पापड़ के टुकड़े इसमें डाल दिए जाते हैं. पापड़ डालने के बाद सब्जी को ज्यादा देर तक पकाया नहीं जाता. पापड़ डालते ही गैस बंद कर दी जाती है, क्योंकि ज्यादा देर पकाने पर पापड़ बहुत नरम हो सकता है. गरम सब्जी में पापड़ हल्का नरम होकर अपना अलग स्वाद देता है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की पारंपरिक सब्जियां आज भी घर के देसी स्वाद को बनाए हुए हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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