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Bihar Chunav 2025: महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव सीएम फेस, मुकेश सहनी डिप्टी सीएम फेस बने. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या अगड़ी जाति के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति क्या तेजस्वी की MY-EBC दलित रणनीति को दर्शाती है?
पटना. बिहार चुनाव को लेकर गुरुवार को हुई महागठबंधन की बहुप्रतीक्षित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई नजारे देखने को मिले. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव को आधिकारिक तौर पर सीएम फेस और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित किया गया. इस मंच पर विभिन्न दलों और समुदायों के नेताओं का जमावड़ा था. लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगड़ी जातियों के बड़े चेहरों की अनुपस्थिति को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा भी मंच पर नजर नहीं आए. वहीं, आरजेडी से भी कोई भूमिहार चेहरा नजर नहीं आया. क्या यह तेजस्वी यादव की रणनीति थी या फिर कुछ और?
महागठबंधन की पीसी के मायने
आरजेडी के मनोज झा ब्राह्मण चेहरा तो थे, लेकिन सुनील सिंह को छोड़कर कोई कद्दावर राजपूत या भूमिहार नेता मंच पर नहीं थे. सुधाकर सिंह जैसे नेता भी नहीं थे. कांग्रेस की ओर से भी कोई भी प्रमुख अगड़ा चेहरा नहीं था. मंच पर सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर थी. राहुल गांधी या अन्य नेताओं की तस्वीर नहीं थी. बीजेपी ने इसे आरजेडी का एकतरफा ड्रामा करार दिया. बता दें कि बिहार की राजनीति हमेशा जाति पर टिकी रही है. 2020 के चुनाव में महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं, लेकिन यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण के बावजूद अगड़ी जातियों का समर्थन न मिलने से हार हुई. अब 2025 में तेजस्वी की रणनीति साफ है कि MY को मजबूत रखो, EBC यानी मुकेश सहनी के निषाद-मल्लाह को लपेटो और वाम दलों से दलित-मजदूर वोट जोड़ो.
क्या तेजस्वी यादव की पीसी थी?
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनडीए की कमजोरी उजागर कर महागठबंधन को एकजुट दिखाना मकसद था. लेकिन आंतरिक कलह और सीट बंटवारे पर 11 सीटों पर विवाद का साया इस मीटिंग में रहा. हालांकि पीसी की बाद कांग्रेस ने कुछ सीटों से अपने प्रत्याशियों के नाम वापस करवाए. इसके बाद भी तेजस्वी की रणनीति साफ थी कि MY+EBC+दलित पर दांव लगाकर 40% वोट पक्का करो और बाकी सीट-टू-सीट लड़ो. सिद्दीकी को बोलना मुस्लिम वोटरों को संदेश था. कुल मिलाकर यह प्रेस कॉन्फ्रेंस तेजस्वी की मजबूत पोजिशनिंग थी.
महागठबंधन के इस महत्वपूर्ण मंच से कांग्रेस और आरजेडी के उन कद्दावर अगड़ी जाति के नेताओं की अनुपस्थिति खटकने वाली थी, जो आमतौर पर ऐसी बड़ी घोषणाओं का हिस्सा बनते हैं. इसकी वजह तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति मानी जा रही है. तेजस्वी यादव की रणनीति का फोकस स्पष्ट है कि वे अपने पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक के साथ मुकेश सहनी के जरिए EBC और लेफ्ट व कांग्रेस के जरिए दलित एवं अल्पसंख्यक वोटों को जोड़कर एक विशाल सामाजिक समीकरण तैयार करना चाहते हैं. यह समीकरण सीधे तौर पर एनडीए के ‘लव-कुश’ और सवर्ण वोट बैंक को चुनौती देगा. मंच से अगड़ी जाति के प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी या कम प्रतिनिधित्व इसी नई सोशल इंजीनियरिंग को दर्शाता है.

