Monday, May 25, 2026
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EC ने 5 करोड़ को अमान्य घोषित कर दिया तो? सिंघवी के सवाल पर SC ने दिया यह जवाब


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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग पर नागरिकता साबित करने का बोझ डालने का आरोप लगाया. कोर्ट ने कहा, 2003 तक के वोटरों को दस्तावेज देने की जरूरत नहीं.

EC ने 5 करोड़ को अमान्य घोषित कर दिया तो? सिंघवी के सवाल पर SC ने दिया यह जवाबबिहार SIR पर सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट जजों कहा कि ऐसा कुछ होता है तो ‘हम यहां बैठे हैं.’
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को बिहार के SIR (Special Intensive Revision) मामले पर जोरदार बहस हुई. सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की कवायद पर गंभीर सवाल उठाए. उनका आरोप था कि आयोग मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर नागरिकता साबित करने का बोझ मतदाताओं पर डाल रहा है, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. सिंघवी ने कहा कि आधार और EPIC (वोटर आईडी) को नागरिकता साबित करने में मानने से आयोग बच रहा है. उनका तर्क था कि यह साफ संकेत है कि आयोग नागरिकता तय करने के लिए इन दस्तावेजों को अपर्याप्त बता रहा है. जबकि, ऐसा करना उसका काम ही नहीं है. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसे संसद ने निर्धारित किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव से महज ढाई महीने पहले 5 करोड़ लोगों को अमान्य घोषित करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. उन्होंने कहा, आप लोगों को केवल ढाई महीने का समय देकर यह नहीं कह सकते कि ‘नागरिकता साबित करो, वरना बाहर हो जाओ’.

‘2003 तक वोटर लिस्ट में नाम तो दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, अगर 5 करोड़ लोगों को अमान्य घोषित किया जाता है, तो हम यहां बैठे हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2003 तक जो लोग वोटर लिस्ट में हैं, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है. चुनाव आयोग ने कहा कि 2003 तक के वोटरों के बच्चों को भी दस्तावेज देने की बाध्यता नहीं होगी.

जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि नागरिकता पर कानून संसद द्वारा बनाया जाना चाहिए. सिंघवी ने कहा कि मौजूदा वोटर लिस्ट में शामिल लोगों के खिलाफ नकारात्मक धारणा बनाना गलत है. यह मामला तत्काल हस्तक्षेप का हकदार है, वरना चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने अंत में दोहराया कि अगर सितंबर के अंत तक किसी भी स्तर पर अवैधता साबित हो जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है.

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Deepak Verma

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He…और पढ़ें

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